होर्मुज पर ट्रंप की बड़ी धमकी, अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात पर ईरान का करारा पलटवार

ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए समझौता किया है, लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव बरकरार है.

Date Updated Last Updated : 16 August 2026, 11:53 AM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: ईरान और ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर एक अहम समझौता किया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी.

ईरान-ओमान के बीच बनी सुरक्षित मार्ग पर सहमति

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई के अनुसार, ओमान के साथ दूसरे मुद्दों पर बातचीत जारी है, लेकिन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अलग व्यवस्था पर सहमति बन गई है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री नाकाबंदी के चलते जलडमरूमध्य में पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल करना आसान नहीं होगा.

होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल है. वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा इसी मार्ग से होकर गुजरती है. ऐसे में यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है.

ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार

ट्रंप ने न्यूयॉर्क में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि ईरान को हराने के बाद वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर सकते हैं. हालांकि, बाद में व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इसे मजाक बताया.

ईरान ने ट्रंप के बयान को गंभीरता से लेते हुए साफ कर दिया कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण बना रहेगा. उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह जलडमरूमध्य ईरान का था, है और रहेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे खोलने या बंद करने का फैसला ईरान ही करेगा.

होर्मुज को लेकर क्यों बढ़ा तनाव?

अमेरिका चाहता है कि होर्मुज सभी व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रहे, जबकि ईरान इसे अपने अधिकार क्षेत्र का हिस्सा मानता है. तेहरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तों को स्वीकार नहीं करता और सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त नहीं करता, तब तक जलमार्ग को पूरी तरह खोलने का फैसला नहीं किया जाएगा.

इस बीच ईरान और ओमान के बीच सुरक्षित जहाजरानी को लेकर बनी सहमति से कुछ राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अमेरिका-ईरान विवाद का स्थायी समाधान अभी दूर दिखाई दे रहा है.

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