सोने से खाने तक रोज की ये आदतें गट हेल्थ और पाचन को पहुंचाती हैं नुकसान

हम अपनी गट हेल्थ और पाचन को नुकसान पहुंचाने के लिए खुद ही जिम्मेदार होते हैं। जिन्हें हम अनजाने में ही फॉलो कर लेते हैं। इस कारण से हमें लंबे समय के नुकसान हो सकते हैं। जानिए क्या है ये खराब आदतें?

Date Updated Last Updated : 27 August 2026, 03:11 PM IST
फॉलो करें:
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: सुबह उठते ही पेट में भारीपन, खाने के बाद सीने में जलन या फिर बार-बार होने वाली खट्टी डकारें, अगर ये तकलीफें अब आपकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं तो इन्हें मामूली समझने की भूल मत कीजिए। दरअसल पेट दर्द, कब्ज और जी मिचलाने जैसे लक्षण दरअसल शरीर की तरफ से भेजे गए वे संकेत हैं जो बताते हैं कि आंतों का भीतरी संतुलन बिगड़ चुका है। और जब गट हेल्थ गड़बड़ाती है, तो उसका असर सिर्फ पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शरीर की ऊर्जा और रोगप्रतिरोधक क्षमता तक इसकी आंच पहुंच जाती है। दिलचस्प बात यह है कि कोई भी बीमारी अचानक दस्तक नहीं देती, बल्कि यह हमारी अपनी रोजमर्रा की छोटी-छोटी लापरवाहियों का ही नतीजा होती है।

बिगड़ता खान-पान का समय बना रहा मुसीबत

आजकल की दौड़ती-भागती जीवनशैली में खाने का कोई तय समय ही नहीं बचा है। सुबह का नाश्ता छोड़ना और रात को देर से भारी भोजन करना अब आम आदत बन चुकी है। 

जब भोजन का समय अनियमित होता है, तो शरीर के भीतर पाचक एंजाइम और एसिड का स्राव भी बेतरतीब हो जाता है, नतीजा एसिडिटी और पेट में भारीपन के रूप में सामने आता है। 


पैकेट बंद खाना और फाइबर की कमी

बाजार से उठाकर सीधे मुंह में डाला जाने वाला प्रोसेस्ड और पैक्ड फूड भले ही जीभ को स्वाद दे दे, लेकिन आंतों के लिए यह किसी दुश्मन से कम नहीं। इनमें मौजूद जरूरत से ज्यादा चीनी, नमक, अनहेल्दी फैट और प्रिजर्वेटिव्स पेट के अच्छे बैक्टीरिया यानी माइक्रोबायोम को धीरे-धीरे खत्म कर देते हैं। जब भोजन में फाइबर पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, तो आंतें भोजन को सही ढंग से पचा ही नहीं पातीं, जिससे पूरा पाचन तंत्र सुस्त पड़ जाता है। इसी के साथ पानी की कमी भी एक बड़ी वजह है। पर्याप्त पानी न पीने से भोजन के पोषक तत्व शरीर में ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते और धीरे-धीरे विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। आंतों को जब पर्याप्त नमी नहीं मिलती तो मल कठोर हो जाता है, जिससे कब्ज की शिकायत बढ़ती है और लंबे समय में इसका असर किडनी तक पर पड़ सकता है।


देर रात जागना और बैठे रहना भी डाल रहे असर

मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन के सामने रात एक-एक बजे तक जागते रहना अब एक नया चलन बन चुका है। इससे शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिनका सीधा असर आंतों की सेहत पर पड़ता है। समय पर रात का खाना न खाना और नींद अधूरी रहना, दोनों मिलकर पाचन क्रिया को और धीमा कर देते हैं। इसी तरह घंटों एक जगह बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधि से दूरी बनाए रखना भी पेट की सुस्ती को बढ़ावा देता है। ऐसी बैठी हुई जीवनशैली न सिर्फ वजन बढ़ाती है बल्कि आंतों की स्वाभाविक हलचल को भी कमजोर कर देती है। इसीलिए दिनभर में छोटे-छोटे अंतराल पर टहलना और सुबह-शाम हल्की एक्सरसाइज को आदत बनाना आंतों को सक्रिय और स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

सम्बंधित खबर