नई दिल्ली: सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) अपने लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और इंस्टाग्राम के संचालन नियमों में अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है। अमेरिका में कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित अदालत में चल रहे एक ऐतिहासिक मुकदमे में हुए समझौते के तहत मेटा 18 साल से कम उम्र के टीनएजर्स के लिए इन ऐप्स के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदियां लागू करेगी। नए नियमों के लागू होने के बाद टीनएजर्स के लिए पूरी रात इन प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस ब्लॉक रहेगा और दिनभर में ऐप इस्तेमाल करने की अधिकतम समय-सीमा केवल दो घंटे तय की जाएगी।
मेटा पर कसेगा शिकंजा
अमेरिका के करीब 28 से अधिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने मेटा के खिलाफ ओकलैंड कोर्ट में एक संयुक्त याचिका दायर की थी। इस केस में कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे कि उसने जानबूझकर अपने ऐप्स में ऐसे एल्गोरिदम और फीचर्स शामिल किए, जो बच्चों को स्मार्टफोन का आदी बनाते हैं।
स्मार्टफोन की लत और बच्चों की सुरक्षा
अदालत में दाखिल याचिकाओं में मेटा पर आरोप था कि उसने अपने व्यावसायिक मुनाफे के लिए बच्चों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। लगातार स्क्रीन टाइम, नोटिफिकेशन के चस्के और सोशल मीडिया पर तुलनात्मक फीचर्स की वजह से किशोरों में अवसाद, नींद की कमी और चिंता जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं बढ़ रही थीं।
मेटा ने कोर्ट में अपनी ओर से किसी भी तरह की गड़बड़ी या गलती को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए नीतिगत बदलावों को लागू करने की बात कही है। मेटा ने इस मुकदमे को निपटाने के लिए करीब 14 से 17 अरब अमेरिकी डॉलर का हर्जाना चुकाने और कड़े नियम मानने की सहमति दर्ज कराई है।
रात के एक्सेस पर हार्ड ब्लॉक
समझौते की शर्तों के मुताबिक, मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स पर कई नए फीचर्स जोड़ेगी। इसके तहत आधी रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच टीनएजर्स के लिए ऐप का फीड पूरी तरह से बंद (हार्ड ब्लॉक) रहेगा, ताकि वे देर रात तक स्क्रॉल न कर सकें। इसके अलावा, रात 10 बजे से सुबह 7 बजे के बीच किसी भी प्रकार के पुश नोटिफिकेशन नहीं भेजे जाएंगे। दिन के समय टीनएजर्स दोनों ऐप्स मिलाकर 24 घंटे में कुल 2 घंटे से ज्यादा वक्त नहीं बिता सकेंगे। हालांकि मेटा ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन नए तकनीकी नियमों को दुनिया भर में पूरी तरह कब से लागू किया जाएगा, लेकिन इस फैसले को बिग टेक कंपनियों की जवाबदेही के इतिहास में एक बड़ी जीत माना जा रहा है।