नई दिल्ली: अफ्रीकी देश मलावी इन दिनों पितृत्व जांच यानी Paternity Test से जुड़े एक चौंकाने वाले आंकड़े की वजह से चर्चा में है. बता दें, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेवफाई के शक में डीएनए टेस्ट कराने वाले करीब 80 फीसदी मामलों में पुरुषों का शक सही निकला है. यानी जांच में पता चला कि बच्चा उस पुरुष का जैविक बच्चा नहीं था, जिसे वह अपना पिता मान रहा था.
हालांकि, इस आंकड़े को समझते समय एक जरूरी बात को ध्यान रखना चाहिए. 80 फीसदी का मतलब यह नहीं है कि मलावी के 80 फीसदी पुरुषों के बच्चे उनके नहीं हैं. यह आंकड़ा सिर्फ उन लोगों का है, जिन्होंने पहले से शक होने के बाद डीएनए टेस्ट कराया है. ऐसे मामलों में पहले से ही संदेह होता है, इसलिए नतीजे ज्यादा हो सकते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, जेनेटिक्स वैज्ञानिक किंगडम क्वापाटा हर महीने 30 से ज्यादा पितृत्व से जुड़े मामलों को देखते हैं. उनका कहना है कि जिन पुरुषों को अपनी पार्टनर पर शक होता है, उनमें से करीब 80 फीसदी मामलों में उनका शक सही साबित होता है. कई मामलों में पुरुषों को WhatsApp चैट या किसी दूसरी जानकारी से शक होता है. इसके बाद वे बच्चे का DNA Test कराने पहुंचते हैं. मलावी की एक अन्य DNA क्लिनिक के प्रमुख फिलिप म्वान्जा ने भी लगभग 80 फीसदी मामलों में बच्चे के जैविक पिता नहीं होने की बात कही है.
लेकिन जब पितृत्व जांच अदालत के आदेश पर होती है, तो तस्वीर काफी अलग दिखाई देती है. किंगडम क्वापाटा के मुताबिक, ऐसे मामलों में करीब 90 फीसदी पुरुष ही बच्चे के जैविक पिता साबित होते हैं. इससे पता चलता है कि पहले से शक के आधार पर कराए गए टेस्ट और अदालत के मामलों के आंकड़ों को एक जैसा नहीं माना जा सकत.
DNA रिपोर्ट सामने आने के बाद कई परिवारों में रिश्ते टूटने, तलाक, बच्चों की जिम्मेदारी और संपत्ति से जुड़े विवाद खड़े हो सकते हैं. ऐसे मामलों का बच्चों और परिवार के दूसरे सदस्यों पर भी भावनात्मक असर पड़ता है. मलावी में एक पितृत्व DNA टेस्ट की कीमत करीब 4 लाख क्वाचा बताई गई है. इसके बावजूद लोगों में ऐसी जांच कराने की मांग बढ़ रही है.