यूपी में मंत्री पुत्र का प्रोटोकॉल पर विवाद! बिना पद के भौकाल, वायरल पत्र ने मचाया बवाल

उत्तर प्रदेश में इन दिनों वीआईपी संस्कृति और रसूख का एक नया नजारा सामने आया है. जहां नेता अपने प्रभाव का प्रदर्शन करते हैं, वहीं उनके साहबजादे भी रौब गांठने में पीछे नहीं हैं.

Date Updated Last Updated : 22 August 2025, 12:22 PM IST
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Minister Swatantra Dev Singh: उत्तर प्रदेश में इन दिनों वीआईपी संस्कृति और रसूख का एक नया नजारा सामने आया है. जहां नेता अपने प्रभाव का प्रदर्शन करते हैं, वहीं उनके साहबजादे भी रौब गांठने में पीछे नहीं हैं.

ताजा मामला जालौन के उरई से उभरकर सामने आया है, जहां जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह बिना किसी आधिकारिक पद के सरकारी प्रोटोकॉल का लाभ उठाते दिखे. एक पत्र के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया है.

तिरंगा यात्रा के लिए प्रोटोकॉल की मांग

जानकारी के अनुसार, 15 अगस्त 2025 को जालौन के उरई में टाउन हॉल से जिला परिषद तक तिरंगा यात्रा का आयोजन होना था, जिसमें जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह को शामिल होना था. इस कार्यक्रम के लिए मंत्री के निजी सचिव ने जिला प्रशासन को एक पत्र जारी किया, जिसमें जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.

पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया, “मंत्री, जल शक्ति विभाग, उत्तर प्रदेश के सुपुत्र श्री अभिषेक सिंह जी दिनांक 15.08.2025 को उक्त कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे. उनके आने-जाने और कार्यक्रम में भाग लेने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए.”

जिला प्रशासन ने की पूरी व्यवस्था

पत्र के आधार पर जिला प्रशासन ने तिरंगा यात्रा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए. हालांकि, इस बीच यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया. स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि बिना किसी सरकारी पद के अभिषेक सिंह को प्रोटोकॉल का लाभ क्यों दिया गया. यह पत्र अब राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर बहस का विषय बन चुका है.

वीआईपी कल्चर पर सवाल

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शुरू से ही वीआईपी संस्कृति के खिलाफ रही है. स्वतंत्र देव सिंह ने भी कई मौकों पर इस मुद्दे पर जोरदार आवाज उठाई थी. लेकिन अब उनके ही पुत्र के लिए प्रोटोकॉल की मांग ने सरकार की इस नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, प्रशासन ने इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन वायरल दस्तावेज ने हलचल मचा दी है.

क्या कहते हैं लोग?

कुछ लोग इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं. इस विवाद ने एक बार फिर वीआईपी संस्कृति और नेताओं के परिजनों के रसूख पर सवाल उठाए हैं.

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