शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष से वापसी! मां और भाई की आंखों में आंसू

भारत के गौरव और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अपनी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के बाद स्वदेश लौट आए हैं. डेढ़ साल बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उनके आगमन पर भव्य स्वागत हुआ. चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही शुभांशु का स्वागत प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने गर्मजोशी के साथ किया.

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Shubhanshu Shukla Lucknow welcome: भारत के गौरव और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अपनी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के बाद स्वदेश लौट आए हैं. डेढ़ साल बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उनके आगमन पर भव्य स्वागत हुआ. चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही शुभांशु का स्वागत प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने गर्मजोशी के साथ किया. इस दौरान शुभांशु का परिवार भी मौजूद था, और मां-बेटे के मिलन का भावुक दृश्य हर किसी के दिल को छू गया.

मां-बेटे का भावनात्मक मिलन 

हवाई अड्डे पर जब शुभांशु अपनी मां से मिले, तो करीब 15 सेकंड तक दोनों एक-दूसरे के गले लगे रहे. मां की आंखों में आंसू थे, क्योंकि उन्होंने अपने बेटे को डेढ़ साल बाद देखा था. शुभांशु ने मां से पूछा, "आप दिल्ली क्यों नहीं आईं?" मां ने जवाब दिया कि तबीयत खराब होने के कारण वह दिल्ली नहीं जा सकीं. इस पल में मां ने शुभांशु को प्यार से सीने से लगाए रखा, और दोनों के बीच का मौन प्रेम हर किसी को भावुक कर गया.

भाई आशीष की गर्व भरी बातें

शुभांशु के भाई आशीष ने इस खास मौके पर कहा, "एयरपोर्ट पर आज का नजारा अविस्मरणीय था. मां-बेटे के मिलन का वो पल, जब दोनों की आंखों से आंसू छलक रहे थे, बेहद खास था." आशीष ने गर्व के साथ कहा, "शुभांशु ने जो हासिल किया, उसने न केवल परिवार, बल्कि पूरे देश और प्रदेश का सिर ऊंचा किया है." उन्होंने बताया कि शुभांशु ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर अपनी अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा किए. आज शाम को शुभांशु उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे और अपनी यात्रा की अनुभूतियों को साझा करेंगे.

आशीष ने भावुक होकर कहा, "शुभांशु मेरे लिए सिर्फ भाई नहीं, बल्कि मेरा दोस्त भी है. आज जब मैंने उसे गले लगाया, तो बस इतना कहा, 'भाई, तुमने तो गर्दा उड़ा दिया!'"

शुभांशु का लखनऊ में स्वागत

लखनऊ पहुंचने पर शुभांशु का स्वागत फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ. हवाई अड्डे पर मौजूद लोग उनकी एक झलक पाने को बेताब थे. शुभांशु की उपलब्धि ने न केवल लखनऊ, बल्कि पूरे भारत को गर्व का अनुभव कराया है. उनकी अंतरिक्ष यात्रा ने युवाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दी है.

भांशु शुक्ला की यह यात्रा न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक नया अध्याय है. उनकी मेहनत और लगन ने साबित किया है कि भारतीय युवा किसी भी क्षेत्र में असंभव को संभव बना सकते हैं.