Sambhal Demography: उत्तर प्रदेश के संभल जिले की जनसांख्यिकी को लेकर एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि संभल में अब केवल 15% हिंदू आबादी बची है. इस चौंकाने वाले आंकड़े के अनुसार, आजादी के समय संभल नगर पालिका में 45% हिंदू थे, लेकिन समय के साथ डेमोग्राफी में भारी बदलाव हुआ है.
इस बदलाव का कारण बड़े पैमाने पर हिंदुओं का पलायन बताया जा रहा है. यह जानकारी एक तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की गोपनीय रिपोर्ट में सामने आई है, जिसे हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया है.
न्यायिक आयोग की जांच
संभल में 24 नवंबर 2024 को मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के बाद इस जांच आयोग का गठन किया गया था. आयोग में इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज देवेंद्र कुमार अरोड़ा, रिटायर्ड IAS अमित मोहन और रिटायर्ड IPS अरविंद कुमार जैन शामिल थे.
यह हिंसा तब शुरू हुई जब स्थानीय अदालत के आदेश पर मस्जिद का सर्वे किया जा रहा था. 19 नवंबर 2024 को चंदौसी के सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) आदित्य सिंह ने एक याचिका के आधार पर सर्वे का आदेश दिया था, जिसमें दावा किया गया था कि 1526 में एक मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी.
रिपोर्ट में क्या-क्या खुलासे?
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं. दंगों के दौरान विदेशी हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिनमें मेड इन USA हथियार भी शामिल थे. सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में लव जिहाद, धर्मांतरण और सामाजिक गतिविधियों के जरिए डेमोग्राफी में बदलाव का भी उल्लेख है.
इतिहास में संभल के पठान और तुर्क समुदायों के बीच रंजिश के कारण बार-बार हिंसा होती रही है, जिसमें हिंदू आबादी को निशाना बनाया गया. इस बार भी दंगों की साजिश रची गई थी, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण हिंदू मोहल्लों को बड़े नुकसान से बचाया जा सका.
सांसद के बयान ने बढ़ाया तनाव
22 नवंबर 2024 को नमाजियों को संबोधित करते हुए सांसद ज़िया-उर-रहमान बर्क ने विवादास्पद बयान दिया था. उन्होंने कहा, “हम पुलिस, प्रशासन या सरकार से दबने वाले नहीं हैं. हम इस देश के मालिक हैं, गुलाम नहीं. मस्जिद थी, है और कयामत तक रहेगी.” इस बयान ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया.
हिंसा का दुखद परिणाम
इस हिंसा में कम से कम पांच लोगों की जान गई. इसके अलावा, एक अन्य रिपोर्ट, जिसे एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) और कारवां-ए-मोहब्बत ने संयुक्त रूप से जारी किया था, सर्वे की प्रक्रिया और हिंसा के कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई थी.
संभल की बदलती डेमोग्राफी और हिंसा की घटनाएं एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती पेश करती हैं. सरकार और प्रशासन को इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने और शांति बहाली के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है.