थमने का नाम नहीं नोएडा हिंसा! पुलिस पर हमला, हाउस हेल्प भी सड़कों पर उतरीं

मंगलवार को नोएडा में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी. सेक्टर 80 में पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं, हालांकि पुलिस ने कहा कि उन्होंने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को शांत करने में कामयाबी हासिल की. 

Date Updated Last Updated : 14 April 2026, 12:11 PM IST
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Courtesy: X (@I_KALLURI)

नोएडा: नोएडा में हालात थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. सोमवार की उग्र घटनाओं के बाद मंगलवार को भी शहर के कई इलाकों में तनाव और हिंसा जारी रही. मंगलवार को नोएडा में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी. सेक्टर 80 में पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं, हालांकि पुलिस ने कहा कि उन्होंने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को शांत करने में कामयाबी हासिल की. 

वहीं, सेक्टर 70 में भी तनाव जारी रहा, जहां पुलिसकर्मियों पर बार-बार पत्थर फेंके गए. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल भीड़ को काबू में करने के प्रयास जारी हैं. स्थिति ऐसी बन गई कि आवासीय क्षेत्रों तक अशांति फैलने लगी. पुलिस वाहनों को भी पथराव का निशाना बनाया गया.

सोमवार के विरोध प्रदर्शन के बाद हिंसा

ये ताजा घटनाएं शहर में व्यापक हिंसा के एक दिन बाद हुई हैं. सोमवार को वेतन वृद्धि को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन जल्द ही बड़े पैमाने पर अशांति में तब्दील हो गया. शहर के 80 ​​से अधिक स्थानों पर 40,000 से अधिक फैक्ट्री श्रमिकों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई.

विरोध प्रदर्शन के चलते नोएडा में कई प्रमुख सड़कें बंद हो गए, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. फेज-2 और सेक्टर 63 में स्थिति और भी गंभीर हो गई, जहां वाहनों में आग लगा दी गई और पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं. सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा और कई वाहनों को जला दिया गया. पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भारी संख्या में बल तैनात किया.

मंगलवार के विरोध प्रदर्शन में हाउस हेल्प भी हुईं शामिल 

मंगलवार को हो विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए, जब हाउसिंग सोसाइटियों में काम करने वाली नौकरानियों सहित घरेलू कामगार क्लियो काउंटी, सेक्टर 121 में इकट्ठा हुए. मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने उन्होंने कम वेतन, ज्यादा काम और छुट्टियों की कमी को लेकर नाराजगी जताई. 

साथ ही ज्यादा सैलेरी और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे.

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