चंडीगढ़: मानसून के दौरान मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बनने के साथ ही पंजाब सरकार ने डेंगू, मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों की निगरानी, रोकथाम और इलाज को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत पात्र परिवारों को बीमारी की स्थिति में कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी मिल रहा है। इस वर्ष की शुरुआत में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया था।
राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए निगरानी और जांच व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ-साथ मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
पंजाब में डेंगू के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। साल 2021 में जहां डेंगू के 23,389 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 में इनकी संख्या घटकर 4,981 रह गई। इसी अवधि में डेंगू से होने वाली मौतों की संख्या भी 55 से घटकर आठ हो गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने इस सुधार का श्रेय काफी हद तक सक्रिय घर-घर निगरानी अभियान को दिया। इस अभियान के तहत पिछले संक्रमण सीजन के दौरान करीब 1.5 करोड़ घरों का दौरा किया गया।
राज्य सरकार ने ‘हर शुक्रवार डेंगू ते वार’ अभियान को भी जारी रखा है। इसके तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को हर शुक्रवार अपने आसपास के इलाकों की जांच करने और कूलर, गमले, पानी की टंकियों तथा अन्य कंटेनरों में जमा पानी को हटाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए पूरे समुदाय की भागीदारी जरूरी है। इसकी जिम्मेदारी केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं हो सकती। हर घर, स्कूल और संस्थान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कहीं भी जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण न बने।”
पंजाब में मच्छर जनित बीमारियों की जांच के लिए सुविधाओं को भी बढ़ाया गया है। राज्य के 47 सेंटिनल सर्विलांस अस्पतालों में डेंगू और चिकनगुनिया की मुफ्त एलिसा (एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट अस्से) जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा मलेरिया के रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट और डेंगू जांच की सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है।
इस बीच, डॉक्टरों ने लोगों को लंबे समय तक रहने वाले बुखार को नजरअंदाज न करने और हर मानसूनी बुखार को सामान्य न मानने की सलाह दी है। जिला अस्पताल, मोहाली की मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. शिफाली चौधरी (एमबीबीएस, एमडी) ने कहा, “मच्छर जनित बीमारियों के लक्षणों को नजरअंदाज करने या इलाज में देरी करने से स्थिति गंभीर हो सकती है। लगातार बुखार, अत्यधिक कमजोरी, शरीर या जोड़ों में तेज दर्द, बार-बार उल्टी, असामान्य रक्तस्राव, सांस लेने में परेशानी या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।”
बीमारी की स्थिति में मरीजों के लिए इलाज तक आर्थिक पहुंच भी बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के नवीनतम उपचार आंकड़ों के अनुसार, 351 लाभार्थियों ने कुल 357 उपचार का लाभ लिया। इन उपचारों पर 89,35,345 रुपये खर्च हुए। इनमें 250 मरीजों ने पी-टाइप अस्पतालों में 256 उपचार करवाए, जिन पर 75,02,250 रुपये खर्च हुए। वहीं, 101 मरीजों ने जी-टाइप अस्पतालों में 101 उपचार करवाए, जिनकी लागत 14,28,895 रुपये रही।
महिला लाभार्थियों की संख्या 194 रही, जिन्होंने 199 उपचार करवाए। वहीं 157 पुरुष लाभार्थियों ने 158 उपचार का लाभ लिया। आयु वर्ग की बात करें तो 31–45 वर्ष के लोगों की संख्या सबसे अधिक रही। इस आयु वर्ग में 102 लाभार्थियों ने 105 उपचार करवाए। इसके बाद 46–60 वर्ष की आयु के 80 लाभार्थियों ने 80 उपचार का लाभ लिया।
डॉ. शिफाली चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना इलाज के खर्च की चिंता कम करके लोगों को समय पर उपचार लेने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) पंजाब के लोगों को इलाज का तत्काल आर्थिक बोझ उठाए बिना समय पर चिकित्सा सुविधा लेने में मदद कर रही है। जब बीमारी की वजह से आपातकालीन उपचार या अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है, तब कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।”
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के एमएमएसवाई आंकड़ों से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से जुड़े उपचार की जरूरत का भी पता चलता है।
कुल: मच्छर जनित बीमारियों के 357 उपचार किए गए, जिन पर 89.35 लाख रुपये खर्च हुए।
डेंगू: कुल उपचारों में सबसे बड़ा हिस्सा डेंगू का रहा। इसमें डेंगू बुखार, डेंगू हेमरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसे मामले शामिल रहे।
डेंगू बुखार: प्रमुख उपचार श्रेणियों में 51 उपचार शामिल रहे, जिन पर 12.22 लाख रुपये खर्च हुए। वहीं 25 उपचारों पर 9.11 लाख रुपये और 55 उपचारों पर 8.46 लाख रुपये की लागत आई।
मलेरिया: जटिल मलेरिया सहित कई मामलों के उपचार का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
चिकनगुनिया: चिकनगुनिया के भी कई उपचार मामले सामने आए।
गंभीर मामले: कुछ गंभीर मरीजों को अतिरिक्त चिकित्सा हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी। इनमें रक्त चढ़ाना, एडवांस्ड इमेजिंग जांच और किडनी फेलियर तथा गंभीर सेप्सिस जैसी जटिलताओं का इलाज शामिल रहा।
इस तरह पंजाब की रणनीति मुख्य रूप से दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला, लगातार निगरानी रखने और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने के जरिए डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे संक्रमणों की रोकथाम करना। दूसरा, बीमारी होने की स्थिति में मरीजों को समय पर और किफायती इलाज उपलब्ध करवाना।