बारिश बनी दिल्ली की 'एयर प्यूरिफायर', पहली बार 'अच्छी' श्रेणी में पहुंचा AQI

राजधानी दिल्ली में लगातार हुई भारी बारिश का असर अब वायु गुणवत्ता पर भी साफ दिखाई दे रहा है. साल 2026 में यह पहला अवसर है जब राजधानी की हवा इस श्रेणी तक पहुंची है. इससे पहले सितंबर 2023 में दिल्ली की वायु गुणवत्ता अच्छी श्रेणी में दर्ज की गई थी.

Date Updated Last Updated : 11 July 2026, 03:58 PM IST
फॉलो करें:
Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में लगातार हुई भारी बारिश का असर अब वायु गुणवत्ता पर भी साफ दिखाई दे रहा है. बता दें, 9 जुलाई को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 48 दर्ज किया गया, जो कि अच्छी श्रेणी में आता है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, साल 2026 में यह पहला अवसर है जब राजधानी की हवा इस श्रेणी तक पहुंची है. इससे पहले सितंबर 2023 में दिल्ली की वायु गुणवत्ता अच्छी श्रेणी में दर्ज की गई थी.

कैसे हुआ प्रदूषण में सुधार 

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार हवा में आया सुधार किसी नई सरकारी योजना या प्रदूषण नियंत्रण अभियान का परिणाम नहीं, बल्कि लगातार हुई तेज बारिश का असर है. राजधानी में हाल के दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने वातावरण में मौजूद प्रदूषक कणों को काफी हद तक साफ कर दिया, जिससे हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है.

कैसे होता है ये संभव 

जानकारों के अनुसार, तेज बारिश के दौरान पानी की बूंदें हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कणों से टकराकर उन्हें जमीन पर ले आती हैं. इस प्राकृतिक प्रक्रिया को 'वेट डिपोजिशन' (गीला निक्षेपण) कहा जाता है. इसके अलावा बारिश सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को भी दबा देती है, जबकि मानसूनी हवाएं बचे हुए प्रदूषकों को वातावरण में फैला देती हैं. सफदरजंग मौसम केंद्र में 24 घंटे के भीतर 72.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसने वायु गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

हर तरह की बारिश कम नहीं करती प्रदूषण 

हालांकि विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि हर तरह की बारिश हवा को साफ नहीं करती. हल्की या रुक-रुक कर होने वाली बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बारीक प्रदूषक कण अधिक समय तक हवा में बने रह सकते हैं. इसलिए केवल तेज और लगातार बारिश ही प्रदूषण के स्तर को प्रभावी ढंग से कम कर पाती है. 

केवल कुुछ दिनों के लिए मिलेगी राहत 

इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है. मानसून समाप्त होने के बाद सर्दियों के मौसम में तापमान में बदलाव और धीमी हवाओं के कारण प्रदूषक फिर से निचले वातावरण में जमा होने लगेंगे. वहीं, वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और कचरा जलाने जैसी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं. ऐसे में लंबे समय तक सुधार के लिए केवल मौसम पर निर्भर रहने के बजाय प्रदूषण नियंत्रण के स्थायी उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी होगा.

सम्बंधित खबर