दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: खत्म हुई वर्क-फ्रॉम-होम पॉलिसी, अब ऑफिस से होगा काम

दिल्ली सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए लागू वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था और दफ्तरों के बदले हुए समय के निर्देश को वापस ले लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को इस फैसले को मंजूरी दे दी.

Date Updated Last Updated : 04 July 2026, 02:42 PM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार और अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम की खबरों के बाद दिल्ली सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए लागू वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था और दफ्तरों के बदले हुए समय के निर्देश को वापस ले लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को इस फैसले को मंजूरी दे दी. बता दें कि वैश्विक ऊर्जा संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए इस साल मई में एक विशेष ऊर्जा संरक्षण अभियान के तहत इन नियमों को लागू किया गया था.

अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य होने पर लिया गया फैसला

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अब जबकि अंतरराष्ट्रीय स्थिति व्यावहारिक रूप से सामान्य हो चुकी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार और शनिवार को दिए जाने वाले वर्क-फ्रॉम-होम की व्यवस्था को समाप्त करने की स्वीकृति दे दी है. इस नए आदेश के लागू होने के साथ ही दिल्ली सरकार के सभी कर्मचारी अब अपने पुराने और सामान्य समय यानी सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक कार्यालयों में काम करेंगे. नगर निगम के कर्मचारियों के कामकाजी समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे पहले की तरह सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक ही काम करना जारी रखेंगे.

ईंधन बचत के लिए लागू हुई थी हाइब्रिड पॉलिसी

इस हाइब्रिड कार्य नीति की शुरुआत इस साल मई के महीने में हुई थी. जब दिल्ली सरकार ने अपने कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने का निर्देश दिया था. यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई उस अपील के बाद लिया गया था. देशवासियों से ईंधन का उपभोग करने और जिम्मेदार खर्च की आदत डालने का आग्रह किया था.

खपत कम करने के लिए उठाए थे कड़े कदम

वर्क-फ्रॉम-होम नीति के साथ-साथ, दिल्ली सरकार ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए ईंधन बचत के कई अन्य उपाय भी लागू किए थे. इसके तहत सभी आधिकारिक बैठकों में से आधी बैठकों को वर्चुअल मोड में स्थानांतरित कर दिया गया था ताकि यात्रा को कम किया जा सके. ट्रैफिक जाम और ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न विभागों के समय को अलग-अलग किया गया था. सरकार ने  सरकारी अधिकारियों के वाहनों के लिए मिलने वाले मासिक पेट्रोल को भी 20 प्रतिशत तक घटाकर 160 लीटर कर दिया था और नए वाहनों की खरीद पर छह महीने की रोक लगा दी थी.

'आर्थिक देशभक्ति'

सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने 'मेट्रो डे' और 'नो कार डे' जैसे अभियानों की भी शुरुआत की थी और सरकारी कॉलोनियों के लिए 58 विशेष बसें चलाई थीं. सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि ये अनिवार्य आर्थिक प्रतिबंध नहीं थे, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग व्यवधानों के बीच देश के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए 'आर्थिक देशभक्ति' को बढ़ावा देने वाले स्वैच्छिक कदम थे, जिन्हें स्थिति सामान्य होते ही अब वापस ले लिया गया है.

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