जहरीली हवा में लिपटी राजधानी, घना कोहरा और ठंड बढ़ी; IMD ने जारी किया येलो अलर्ट

दिन प्रतिदिन दिल्ली की हवा और दूषित होती जा रही है. कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और हवा की रफ्तार कम होने के कारण राजधानी की हवा एक बार फिर बेहद खराब हो गई है.

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नई दिल्ली: नई दिल्ली में सर्दी का असर अब साफ तौर पर हवा की गुणवत्ता पर दिखने लगा है. कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और हवा की रफ्तार कम होने के कारण राजधानी की हवा एक बार फिर बेहद खराब हो गई है. हालात ऐसे हैं कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है. मौसम विभाग ने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट भी जारी कर दिया है. 

फिर बढ़ा प्रदूषण

दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. ठंड के साथ ही दिल्ली की हवा में प्रदूषण फिर से महसूस की जा रही है. शुक्रवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस था, जोकि इस मौसम के सबसे कम तापमानों में शामिल है. जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, वैसे-वैसे हवा में प्रदूषण फैलने की जगह जमीन के पास ही जमा हो रहा है. हवा शांत रहने की वजह से धुआं और जहरीले कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है.

AQI का बढ़ता स्तर पर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 9 जनवरी को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 318 रहा. यह स्तर अब बहुत खराब की श्रेणी में आता है. राजधानी के 40 में से 24 निगरानी केंद्रों पर हवा बेहद खराब दर्ज की गई है, जबकि बाकी इलाकों में स्थिति खराब  रही. एक दिन पहले के AQI की  बात की जाए तो वह करीब 289 नापा गया था, यानी ठंड के साथ प्रदूषण में और बढ़ोतरी हुई है.

घना कोहरा, येलो अलर्ट जारी

भारतीय मौसम विभाग ने सुबह के समय घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है. कोहरे के कारण दृश्यता कम हो गई है, जिससे सड़क और हवाई यातायात पर असर पड़ा है. मौसम विभाग का कहना है कि दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.5 से 3 डिग्री तक कम रह सकता है, जिससे आने वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति और खराब हो सकती है.

इन इलाकों में रही सबसे ज्यादा ठंड

बात करें दिल्ल के सबसे ठंडे इलाके की तो दिल्ली का पालम इलाका सबसे ठंडा रहा, जहां का न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके अलावा रिज और आया नगर में भी तापमान 5.8 डिग्री तक गिर गया. सफदरजंग वेधशाला में भी तापमान सामान्य से नीचे रिकॉर्ड किया गया. ठंडे मौसम के कारण प्रदूषण जमीन के पास ही फंसा हुआ है.