नई दिल्ली: दिल्ली का ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाका मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. जिसे नगर निगम का एक सामान्य अतिक्रमण विरोधी अभियान था. वह अफवाहों और सोशल मीडिया की भड़काऊ ताकत के कारण हिंसक झड़प में बदल गया. दिल्ली पुलिस ने अब इस मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है और 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की पहचान की है, जिन पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप है.
हिंसा की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक भ्रामक ऑडियो मैसेज और वीडियो तेजी से वायरल होने लगा. दावा किया गया कि रामलीला मैदान के पास स्थित सदियों पुरानी फैज-ए-इलाही मस्जिद को गिराया जा रहा है. पुलिस की शुरुआती जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा पाया गया.
असल में हाईकोर्ट के आदेश पर मस्जिद के आसपास के अवैध बैंक्वेट हॉल, डायग्नोस्टिक सेंटर और हज यात्रियों के कमरे को गिराया जा रहा था, लेकिन मस्जिद गिराए जाने की अफवाह ने देखते ही देखते 200 से अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा कर दी, जिसने पुलिस पर पथराव और बोतलों से हमला शुरू कर दिया.
डिजिटल दौर में फेक न्यूज कितनी घातक हो सकती है, यह इस घटना से साफ है. दिल्ली पुलिस ने एक महिला इन्फ्लुएंसर को पूछताछ के लिए समन भेजा है, जिसने कथित तौर पर मस्जिद गिराने का वीडियो फ्लैग किया था.
पुलिस की मॉनिटरिंग टीम अब उन 10 प्रोफाइल की जांच कर रही है जिन्होंने इस तनावपूर्ण माहौल में आग में घी डालने का काम किया. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि व्हाट्सएप पर सर्कुलेट हुए ऑडियो क्लिप्स ने इलाके में दहशत फैलाने और भीड़ को उकसाने में बड़ी भूमिका निभाई.
अब तक अफान, आदिल, शाहनवाज और हमजा समेत 11 संदिग्धों को दबोचा जा चुका है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है. दिल्ली की एक अदालत ने पांच मुख्य आरोपियों को 13 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. दूसरी तरफ, दिल्ली के मेयर राजा इकबाल सिंह ने साफ कर दिया है कि जामा मस्जिद के आसपास के इलाकों का भी सर्वे किया जाएगा और अतिक्रमण के खिलाफ यह मुहिम जारी रहेगी. हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके जवाब में पथराव हुआ. फिलहाल, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है.