PM मोदी आज रात 8:30 बजे करेंगे देश का संबोधन! क्या होगा क्या होगा महिला आरक्षण का भविष्य

देश की राजनीति में मौजूदा समय में हलचल तेज हो गई है. ये हलचल तब तेज हुई जब प्रधामंत्री ने देश के नाम संबोधन की घोषणा की. यह संबोधन ऐसे समय पर प्रस्तावित है, जब संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा अहम विधेयक अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर सका.

Date Updated Last Updated : 18 April 2026, 03:23 PM IST
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Courtesy: ANI

नई दिल्ली: देश की राजनीति में मौजूदा समय में हलचल तेज हो गई है. ये हलचल तब तेज हुई जब प्रधामंत्री ने देश के नाम संबोधन की घोषणा की. यह संबोधन ऐसे समय पर प्रस्तावित है, जब संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा अहम विधेयक अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर सका, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है.

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से जानकारी दी गई कि आज रात 8:30 बजे प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे, हालांकि भाषण का विषय स्पष्ट नहीं किया गया है. यह घोषणा उस दिन के तुरंत बाद आई है, जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाया.

लोकसभा में क्यों अटका विधेयक

महिला आरक्षण से जुड़े इस विधेयक का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना था. इसके साथ ही लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने और नए परिसीमन का प्रस्ताव भी शामिल था. हालांकि, मतदान के दौरान इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका—विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया.

सरकार और विपक्ष आए आमने-सामने

सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस अहम मुद्दे पर सहयोग नहीं किया और महिलाओं के हितों के खिलाफ खड़ा हुआ है. इसे उन्होंने एक गंभीर राजनीतिक गलती भी बताया.

राजनीतिक संदेश को लेकर रणनीति

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने पार्टी नेताओं से कहा है कि इस मुद्दे को देश के हर कोने तक पहुंचाया जाए. उनका मानना है कि जनता को यह समझाना जरूरी है कि महिला सशक्तिकरण के इस प्रयास में किसने समर्थन दिया और किसने विरोध किया.

विपक्ष की स्थिति पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि विपक्ष अब अपने रुख को लेकर सफाई देने की कोशिश कर रहा है. वहीं, सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इस मुद्दे का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है.

अब सबकी नजर संबोधन पर

विधेयक के पारित न हो पाने के बाद महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे अभी भी अधर में हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री के संबोधन से यह उम्मीद की जा रही है कि वह सरकार की आगे की रणनीति और इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा देंगे.

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