Gold-Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, बाजार में बढ़ी हलचल

वैश्विक बाजार में आई तेज गिरावट का असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी साफ दिखा है. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में दाम लगातार नीचे आ रहे हैं, जिससे निवेशकों और खरीदारों की नजर अब अगले रुख पर टिकी है.

Date Updated Last Updated : 30 June 2026, 11:13 AM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार जारी उतार-चढ़ाव के बीच मंगलवार, 30 जून 2026 को निवेशकों के लिए एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला. अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार खुलते ही दोनों कीमती धातुओं के दाम में तेज गिरावट दर्ज की गई. इसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया है. वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, पश्चिम एशिया में बदलते हालात और अमेरिकी बाजार से जुड़े संकेतों के चलते निवेशकों का रुख बदलता नजर आ रहा है. ऐसे में सोना-चांदी खरीदने या निवेश करने की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर टिकी हुई है.

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स (COMEX) में मंगलवार सुबह सोने की कीमत में 1.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद सोने का भाव घटकर 3,980.70 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. वहीं चांदी की कीमत में भी कमजोरी देखने को मिली. सिल्वर 1.46 प्रतिशत फिसलकर 57.325 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया. बता दें कि 29 जनवरी 2026 को सोना करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर तक पहुंच गया था. उसी दिन चांदी ने भी 121 डॉलर प्रति औंस का अपना रिकॉर्ड स्तर बनाया था. मौजूदा कीमतें इन रिकॉर्ड स्तरों से काफी नीचे आ चुकी हैं.

एमसीएक्स पर ऑल टाइम हाई से काफी नीचे पहुंचे दाम

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स (MCX) में भी सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इस साल 29 जनवरी को सोना 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. वहीं सोमवार को बाजार बंद होने तक सोने का भाव 1,42,413 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,23,000 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई. इससे साफ है कि दोनों कीमती धातुएं अपने ऑल टाइम हाई से काफी नीचे कारोबार कर रही हैं.

कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं. सबसे बड़ा असर पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालात का देखा जा रहा है, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बनी हुई है. इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. जब ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद होती है तो डॉलर मजबूत होने लगता है. 

मजबूत डॉलर के कारण सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ जाता है और उनके दाम कमजोर पड़ने लगते हैं. इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिल रहा है, जिससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है.दक्षिण-एशियाई और प्रवासी

क्या अभी निवेश करना सही रहेगा?

बाजार जानकारों का मानना है कि गिरावट के दौर में खरीदारी के अवसर बन सकते हैं, लेकिन निवेश करते समय सावधानी बरतना जरूरी है. यदि आपका लक्ष्य लंबी अवधि का निवेश है तो मौजूदा स्तर पर धीरे-धीरे खरीदारी करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरी रकम एक साथ निवेश करने के बजाय हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करना अधिक सुरक्षित तरीका माना जाता है. इससे बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम हो जाता है. वहीं जिन परिवारों में शादी या अन्य मांगलिक कार्यक्रम होने वाले हैं, उनके लिए भी मौजूदा कीमतें राहत देने वाली साबित हो सकती हैं.

घरेलू बाजार में भी बदल रहा है खरीदारी का रुझान

सोने और चांदी की कीमतों में आई कमजोरी का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिल रहा है. हाल के समय में खरीदारी का रुझान पहले की तुलना में कुछ कम हुआ है. वहीं कई लोग कीमतों में पहले आई तेजी के दौरान खरीदे गए सोने की बिक्री भी कर रहे हैं. फिलहाल बाजार की अगली दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार पर लगातार नजर रखने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है.

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