कार खरीदना अब बोझ नहीं रहेगा, मिडिल क्लास के लिए खुशखबरी, बजट 2026 में फ्यूल में राहत

बजट 2026 में केंद्र सरकार ने बायोगैस-मिश्रित CNG को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है. अब बायोगैस की कीमत को केंद्रीय उत्पाद शुल्क की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा.

Date Updated Last Updated : 01 February 2026, 05:53 PM IST
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नई दिल्ली: जो लोग अपनी कार से निकलने से पहले अपना बटुआ चेक करते हैं, उनके लिए अच्छी खबर है. खासकर मिडल क्लास लोगों के लिए, जो खरीदने के बाद एक-एक फ्यूल का ध्यान रखते हैं. केंद्र सरकार के बजट 2026 ने आम लोगों को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. इस बार बजट में बायोगैस से बनी CNG पर बड़ी टैक्स छूट दी गई है. संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि बायोगैस-मिश्रित CNG पर अब अतिरिक्त टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा. इससे फ्यूल की कीमतें कम होंगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी.

नए बजट में यह बदलाव

बजट 2026 के तहत, बायोगैस-मिश्रित CNG पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की गणना करने का तरीका बदल दिया गया है. अब उत्पाद शुल्क की गणना करते समय बायोगैस के पूरे मूल्य को बाहर रखा जाएगा. पहले टैक्स गणना में बायोगैस घटक को भी शामिल किया जाता था, जिससे कीमत बढ़ जाती थी. इस बदलाव के बाद टैक्स का सीधा असर कम होगा और CNG की कीमत में कमी देखने को मिलेगी.

बायोगैस और CNG का संबंध

बायोगैस फसल के बचे हुए अवशेष, कृषि कचरे और शहर के कचरे से बनती है. इस बायोगैस को रेगुलर CNG के साथ मिलाकर कम कार्बन वाला फ्यूल बनाया जाता है. सरकार इसे स्वच्छ ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी ऐसे फ्यूल की मांग बढ़ रही है, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है.

पुराने नियमों में क्या समस्या थी?

पुराने नियमों के तहत, बायोगैस को आंशिक राहत तो मिली थी, लेकिन पूरी छूट नहीं मिली थी. 2023 में, केवल बायोगैस पर लगने वाले GST को उत्पाद शुल्क से घटाया गया था. इसके बावजूद, बायोगैस घटक पर टैक्स बना रहा. रेगुलर CNG पर लगभग 14 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगता था, जिसका कीमत पर दोहरा असर होता था. नई नीति से आम लोगों को फायदा होगा.

कार, ऑटो और ट्रक ड्राइवरों का सीधा फायदा

नई घोषणा के बाद, बायोगैस के पूरे मूल्य पर उत्पाद शुल्क खत्म हो जाएगा. इससे CNG की कीमत में प्रति किलोग्राम कुछ रुपये की कमी आ सकती है. इससे कार, ऑटो और ट्रक ड्राइवरों को सीधा फायदा होगा. यह कमर्शियल गाड़ी चलाने वालों के लिए डीज़ल का एक बहुत ही सस्ता विकल्प होगा. इससे तेल इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी.

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