नई दिल्ली: ऑनलाइन ऑर्डर पर निर्भर रहने वाले लोगों के लिए अब एक बुरी खबर आ रही है. दम मिनट में डिलीवरी करने वाली क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर अब सरकार सख्त हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, इसे लेकर सरकार ने अब एक बड़ा फैसला सुनाया है. उन्होंने न केवल बीच में हस्तक्षेप किया है बल्कि गिग वर्कर्स की सुरक्षा पर चिंता भी जताई है.
जब दिसंबर के अंत में देशभर में डिलीवरी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी. इन हड़तालों में काम के अत्यधिक दबाव, असुरक्षित डिलीवरी मॉडल और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए थे.
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और ज़ोमैटो जैसी बड़ी कंपनियों के साथ बैठक की और उनसे डिलीवरी समय को लेकर किए जा रहे वादों पर दोबारा विचार करने को कहा है.
सरकार की चिंता यह है कि बेहद कम समय में डिलीवरी का दबाव डिलीवरी पार्टनर्स की जान जोखिम में डाल सकता है, चाहे कंपनियां यह दावा करें कि उनकी डिलीवरी सिस्टम और नजदीकी स्टोर्स की वजह से तेज़ होती है.
सूत्रों के मुताबिक, ब्लिंकइट अपने सभी विज्ञापनों, प्रचार अभियानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से '10 मिनट में डिलीवरी' जैसे शब्द हटा देगा.
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि डिलीवरी की रफ्तार धीमी हो जाएगी. यह केवल डिलीवरी कर्मियों पर समय का अनावश्यक दबाव न पड़े इस लिए है.
सरकारी बातचीत के दौरान सभी प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि वे भी अपने विज्ञापनों से एक फिक्स डिलीवरी समयसीमा हटाएंगी. इससे यह संदेश जाएगा कि डिलीवरी की सुरक्षा, गति से ज्यादा अहम है.
25 और 31 दिसंबर को गिग वर्कर्स की देश भर में हड़ताल किया था. उन्होंने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया. उनका आरोप था कि तेज़ डिलीवरी मॉडल के कारण कर्मचारियों की आय घट रही है और उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही.
हालांकि नए साल की पूर्व संध्या पर कई शहरों में डिलीवरी सेवाएं सामान्य रहीं, लेकिन इन हड़तालों ने अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी और वर्कर सेफ्टी की बहस को तेज कर दिया.