एक बूथ से 340 मुस्लिम मतदाताओं के नाम एक साथ हटाए, BLO का नाम भी गायब

पश्चिम बंगाल के बसीरहाट इलाके में मतदाता सूची से जुड़े एक फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. बसीरहाट उत्तर विधानसभा क्षेत्र के बोरो गोबरा गांव के बूथ नंबर 5 से 340 लोगों के नाम हटा दिए गए.

Date Updated Last Updated : 26 March 2026, 01:47 PM IST
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Courtesy: Pinterest

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बसीरहाट इलाके में मतदाता सूची से जुड़े एक फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. एक ही बूथ से सैकड़ों नाम एक साथ हटाए जाने की घटना ने स्थानीय लोगों में नाराजगी और असंतोष पैदा कर दिया है. 

यह मामला बसीरहाट उत्तर विधानसभा क्षेत्र के बोरो गोबरा गांव के बूथ नंबर 5 से जुड़ा है, जहां पूरक मतदाता सूची जारी होने के बाद 340 लोगों के नाम हटा दिए गए. ये सभी लोग पहले मसौदा सूची में 'विचाराधीन' श्रेणी में रखे गए थे, लेकिन आखिरी सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया. 

नाम हटाने से बढ़ा आक्रोश

अब इस बात से लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है. इस घटना ने तब और तूल पकड़ लिया जब पता चला कि बूथ लेवल अधिकारी मोहम्मद शफीउल आलम का नाम भी हटाए गए लोगों में शामिल है.  इसके बाद सैकड़ों स्थानीय लोग विरोध में सड़कों पर उतर गए और इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही आरोप लगाया कि उनके साथ भेदभाव किया गया है.

पारदर्शिता पर उठे सवाल

प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे, फिर भी उनके नाम हटा दिए गए हैं. स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और उन्हें उचित जानकारी भी नहीं दी गई. जिस कारण अब उन्हें इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस मुद्दे ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

अधिकारियों से नहीं मिला जवाब

इन सबके बीच अब बूथ अधिकारी आलम ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को हल करने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट समाधान नहीं मिला. उनका कहना है कि उन्होंने खुद ही वोटर डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस में मदद की थी और सभी नियमों का पालन भी किया था. लेकिन उसके बाद भी इसका कोई नतीजा नहीं मिला.

992 मतदाता थे पंजीकृत 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बूथ पर कुल 992 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें से 38 नाम सामान्य कारणों जैसे मृत्यु या स्थानांतरण के चलते हटाए गए. जबकि 358 मामलों को जांच के लिए चिन्हित किया गया था, जिनमें से 18 का समाधान पहले ही हो चुका था. बाकी 340 नाम अंतिम सूची जारी होते ही हटा दिए गए.

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