स्टालिन ने समर्थन के लिए किया राजी... आखिर कैसे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे विजय?

तमिलनाडु में कई दिनों की राजनीतिक हलचल के बाद आखिरकार विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया. सहयोगी दलों के समर्थन और सत्ता समीकरणों के बीच राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है.

Date Updated Last Updated : 10 May 2026, 08:39 AM IST
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Courtesy: ANI

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में आखिरकार वह पल आ ही गया, जिसका पिछले कई दिनों से इंतजार किया जा रहा था. अभिनेता से नेता बने विजय अब राज्य की सत्ता संभालने जा रहे हैं. कई दिनों तक चले राजनीतिक मंथन, जोड़-तोड़ और सहयोगी दलों के समर्थन के बाद तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके साथ ही विजय का मुख्यमंत्री बनना तय हो गया है. यह बदलाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि करीब सात दशक बाद तमिलनाडु में कोई गैर-डीएमके और गैर-एआईएडीएमके सरकार बनने जा रही है.

डीएमके प्रवक्ता ए. सरवनन ने कहा कि पार्टी प्रमुख एम.के. स्टालिन ने संवैधानिक संकट से बचने के लिए बड़ा फैसला लिया. उनके मुताबिक, लंबे विचार-विमर्श के बाद डीएमके ने अपने सहयोगी दलों को टीवीके का समर्थन देने के लिए तैयार किया. सरवनन ने विजय को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला राज्य की राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डीएमके नहीं चाहती थी कि तमिलनाडु किसी संवैधानिक विवाद में फंसे.

कांग्रेस पर डीएमके का हमला

डीएमके प्रवक्ता ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जो पांच सीटें मिलीं, वह डीएमके कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा थीं. सरवनन के अनुसार, कांग्रेस ने सबसे पहले डीएमके गठबंधन से अलग होकर टीवीके को समर्थन दिया, लेकिन उसकी चुनावी सफलता के पीछे डीएमके का मजबूत संगठन था. 

कैसे मिला विजय को बहुमत?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. पार्टी ने 108 सीटें जीती थीं, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से वह पीछे रह गई थी. बाद में विजय को एक सीट छोड़नी पड़ी, जिससे टीवीके की संख्या 107 हो गई. इसके बाद कांग्रेस के पांच विधायक, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और माकपा के दो-दो विधायकों ने टीवीके को समर्थन दिया. इससे गठबंधन का आंकड़ा 116 तक पहुंचा.

राजनीतिक तस्वीर तब पूरी तरह बदल गई जब विदुथलाई चिरुथाइगल कच्ची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के चार विधायकों ने भी विजय को समर्थन देने का फैसला किया. इसके बाद टीवीके गठबंधन की ताकत 120 विधायकों तक पहुंच गई, जो बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े से ज्यादा है.

राज्यपाल से मुलाकात के बाद साफ हुआ रास्ता

बहुमत साबित करने के बाद विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने टीवीके विधायक दल के नेता चुने जाने का पत्र सौंपा. साथ ही कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई-एम, वीसीके और आईयूएमएल की ओर से मिले समर्थन पत्र भी राज्यपाल को दिए गए. इन दस्तावेजों की जांच के बाद राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने का न्योता दिया. साथ ही उन्हें 13 मई या उससे पहले विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने को कहा गया है.

रविवार को लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

विजय रविवार सुबह 10 बजे चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. इस समारोह को ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि राज्य की राजनीति में लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमके का दबदबा रहा है. 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर दी है. फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने कम समय में खुद को मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है. डीएमके गठबंधन के सहयोगी दलों ने साफ कर दिया है कि वे बाहर से समर्थन देंगे. वीसीके समेत अन्य दल सरकार में शामिल नहीं होंगे. हालांकि, विजय ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है.

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