तालिबान के नए नियमों पर बवाल, लड़कियों की ‘चुप्पी’ को बताया सहमति

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने विवाह और बाल विवाह से जुड़े नए नियम लागू किए हैं, जिनमें “कुंवारी लड़की की चुप्पी” को शादी के लिए सहमति मानने वाला प्रावधान सबसे ज्यादा विवादों में है. इस फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है.

Date Updated Last Updated : 17 May 2026, 02:58 PM IST
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नई दिल्ली: तालिबान शासन ने अफगानिस्तान में विवाह, तलाक और बाल विवाह से जुड़े नए पारिवारिक कानून लागू किए हैं, जिन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है. नए नियमों में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं जिन्हें लेकर महिला अधिकार संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों ने गंभीर चिंता जताई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 'पति-पत्नी के बीच अलगाव के सिद्धांत' शीर्षक वाले 31 अनुच्छेदों के इस कानून को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने मंजूरी दी है. इसे मई के मध्य में शासन के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया. नए नियमों में विवाह, बाल विवाह, लापता पति, धर्म परिवर्तन और व्यभिचार जैसे मुद्दों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं.

'कुंवारी लड़की की चुप्पी' को माना जाएगा सहमति

सबसे ज्यादा विवाद उस प्रावधान को लेकर हो रहा है जिसमें कहा गया है कि यौवन प्राप्त कर चुकी “कुंवारी लड़की” की चुप्पी को विवाह के लिए सहमति माना जा सकता है. हालांकि नियम में यह भी कहा गया है कि किसी लड़के या पहले से विवाहित महिला की चुप्पी को सहमति नहीं माना जाएगा.

नियम में 'खियार अल-बुलुघ' का भी जिक्र किया गया है. इस अवधारणा के तहत कम उम्र में शादी करने वाला बच्चा यौवन प्राप्त करने के बाद विवाह रद्द करने की मांग कर सकता है, लेकिन इसके लिए तालिबान अदालत की अनुमति जरूरी होगी.

बाल विवाह को लेकर बढ़ी चिंता

नए नियमों के अनुसार, यदि किसी नाबालिग की शादी पिता या दादा के अलावा किसी अन्य रिश्तेदार द्वारा तय की जाती है, तब भी कुछ शर्तों के साथ उसे कानूनी मान्यता दी जा सकती है. हालांकि “अनुपयुक्त” जीवनसाथी या अनुचित दहेज वाले विवाहों को अमान्य माना जाएगा.

इन प्रावधानों के बाद बाल विवाह को लेकर चिंता और बढ़ गई है. कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पहले ही तालिबान की नीतियों को महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के खिलाफ बताया है.

महिलाओं पर बढ़ते प्रतिबंधों पर आलोचना

अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान सरकार महिलाओं और लड़कियों पर कई प्रतिबंध लगा चुकी है. अफगानिस्तान में लड़कियों की छठी कक्षा के बाद की शिक्षा पर रोक है, जबकि महिलाओं के विश्वविद्यालयों में प्रवेश और कई क्षेत्रों में काम करने पर भी पाबंदियां लागू हैं.

राजनीतिक टिप्पणीकार फहीमा मोहम्मद ने कहा, 'बाल विवाह किसी भी मायने में विवाह नहीं है. एक बच्ची ठीक से सहमति नहीं दे सकती, और चुप्पी को सहमति मानना खतरनाक है क्योंकि यह एक लड़की की आवाज को पूरी तरह से दबा देता है.'

उन्होंने आगे कहा, 'एक मुस्लिम होने के नाते, मैं इस विचार को पूरी तरह से खारिज करती हूं कि यह संपूर्ण इस्लाम का प्रतिबिंब है.'

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