नई दिल्ली: तिब्बत में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है, लेकिन चीन के सरकारी मीडिया में इस आपदा की भयावह तस्वीरों के बजाय राहत और बचाव अभियान को प्रमुखता दी जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में बाढ़ का तेज बहाव सड़कों, इमारतों और दूसरे ढांचों को नुकसान पहुंचाता नजर आ रहा है। हालांकि, चीन के इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर ऐसे ज्यादातर वीडियो और पोस्ट आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा नेपाल और तिब्बत के बीच अहम सीमा मार्ग ग्यिरोंग पोर्ट के बहने की हो रही है। सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुए एक वीडियो में पानी का तेज बहाव कुछ ही सेकंड में पोर्ट के हिस्से को अपने साथ ले जाता दिखाई देता है। इसके साथ ही वीडियो में कई लोग भी नजर आ रहे हैं। चीन की ओर से अब तक केवल पांच लोगों की मौत की जानकारी दी गई है, जबकि लापता लोगों की संख्या को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
Apocalyptic view of the flash flood that struck northern Nepal and Tibet today with waves estimated at 8 to 10 meters high. pic.twitter.com/Fg6ccZ4N9v
— Massimo (@Rainmaker1973) August 26, 2026
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने सैकड़ों आपातकालीन कर्मचारियों को राहत और बचाव अभियान में लगाया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत कार्यों में समन्वय के निर्देश दिए हैं। वीडियो में सरकारी मीडिया में बचाव दलों को मलबे, कीचड़ और पत्थरों के बीच खोजबीन करते हुए दिखाया जा रहा है।
हालांकि, आपदा के वास्तविक असर की स्वतंत्र तस्वीरें और स्थानीय लोगों की प्रत्यक्ष जानकारी बेहद सीमित हैं। विदेशी पत्रकारों के लिए तिब्बत में स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करना भी मुश्किल है। बीबीसी की पत्रकार लॉरा बिकर के मुताबिक, किसी बड़ी घटना के बाद स्वतंत्र जानकारी जुटाने के लिए पत्रकारों के पास बहुत कम समय रहता है, क्योंकि सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो जल्द ही हटाए जा सकते हैं।
तिब्बत को लेकर चीन की संवेदनशीलता का एक लंबा राजनीतिक इतिहास भी है। बीजिंग लंबे समय से क्षेत्र में राजनीतिक असंतोष और विरोध को नियंत्रित करता रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ जैसी बड़ी आपदा की जानकारी पर कड़ा नियंत्रण रखने के पीछे सरकार की प्राथमिकता हालात को नियंत्रण में दिखाना और किसी संभावित असंतोष को रोकना हो सकती है।