नई दिल्ली: नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा का जख्म अभी भरा भी नहीं था कि सरहद पार से आई एक नई खबर ने हर किसी की सांसें थाम दी हैं। तिब्बत की तरफ एक बार फिर पानी का बांध टूटने की पुख्ता सूचना मिलने के बाद शुक्रवार को नेपाल सरकार ने पूरे सीमावर्ती इलाके में आपातकालीन चेतावनी जारी कर दी है। बुधवार को नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ ने जहां 469 लोगों की जान ले ली और 1,500 से ज्यादा लोगों को मलबे तथा नदी के तेज बहाव में लापता कर दिया, वहीं अब इस नए खतरे ने राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों की जान पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
जोखिम में फंसी जिंदगियां और मोर्चे पर अलर्ट नेपाली सेना
भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के निचले इलाकों में एक बार फिर पानी का जलस्तर अचानक बढ़ने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने नदियों के आसपास बचाव कार्य में लगे सभी राहत दलों और आम नागरिकों को बिना किसी देरी के तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सख्त हिदायत दी है।
3 हजार से अधिक का रेस्क्यू
बुधवार को आई जल प्रलय ने नेपाल के रसुवा जिले में ऐसी भीषण तबाही मचाई है जिसके निशान इतनी आसानी से नहीं मिटने वाले। पहाड़ी इलाकों से बहे मलबे, विशाल चट्टानों और पानी के प्रचंड सैलाब ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के रास्ते में आने वाली इमारतों, पुलों, गाड़ियों और पक्की सड़कों को तिनके की तरह बहा दिया था।
नेपाल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बेहद विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अब तक चलाए गए हवाई राहत अभियानों के जरिए आपदा प्रभावित क्षेत्रों से 3,253 लोगों को एयरलिफ्ट करके सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। मुख्य पुलों और रास्तों के ध्वस्त हो जाने से दूरदराज के कई इलाकों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है। अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश के लिए भी सेना के जवानों को तैनात किया गया हैं।
ग्रामीणों के लिए हाई अलर्ट जारी
इस नए बांध के टूटने से पहले भी नेपाली और चीनी अधिकारी उपरी क्षेत्र में बनी एक नई और उफान मारती झील के खतरे पर लगातार नजर बनाए हुए थे। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, इस झील में लगभग 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी समाने का अनुमान था। यह खतरनाक झील नेपाल-चीन सीमा के मुख्य गिरोंग (केरूंग) पोर्ट से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो खुद बुधवार की तबाही में कीचड़ और गाद से बुरी तरह पट गया था। अब तिब्बत की ओर से आई इस नई बांध विफलता की खबर ने राहत अभियानों की रफ्तार को धीमा कर दिया है, क्योंकि बचाव दल को अब एक तरफ जिंदगियां बचानी हैं तो दूसरी तरफ खुद को भी आने वाले नए सैलाब से सुरक्षित रखना है।