भारत को साइडलाइन कर बांग्लादेश का बड़ा एक्शन, गंगा पर शुरू हुआ नया मिशन

भारत ने 1975 में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज का निर्माण कराया था. इसका मुख्य उद्देश्य गंगा के पानी को हुगली नदी की तरफ मोड़कर जमी गाद को साफ करना था, ताकि कोलकाता बंदरगाह तक जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रह सके.

Date Updated Last Updated : 14 May 2026, 09:24 AM IST
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Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: बांग्लादेश ने पद्मा नदी पर एक बड़ी बांध परियोजना को मंजूरी देकर भारत-बांग्लादेश जल संबंधों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 1996 की गंगा जल बंटवारा संधि की अवधि इस साल दिसंबर में समाप्त होने वाली है. बांग्लादेश का दावा है कि यह परियोजना फरक्का बैराज के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद करेगी.

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरी तरह बांग्लादेश सरकार के फंड से तैयार किया जाएगा. अनुमान है कि यह प्रोजेक्ट 2033 तक पूरा हो सकता है और इसके जरिए राजशाही, ढाका और बरीसाल डिवीजन के कई जिलों को लाभ मिलेगा.

परियोजना के पहले चरण को मिली मंजूरी

अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता वाली ECNEC यानी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद कार्यकारी समिति ने इस परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दे दी है. परियोजना की अनुमानित लागत 34,497.25 करोड़ टका बताई गई है. सरकार का कहना है कि यह बांध बांग्लादेश के जल प्रबंधन और भंडारण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा.

भारत से बात करने की जरूरत नहीं

जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने कहा कि इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य गंगा नदी पर बने फरक्का बैराज के प्रभाव को कम करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना भारत और बांग्लादेश के बीच साझा 54 नदियों से जुड़े मुद्दों से अलग है. बांग्लादेश के मंत्री ने कहा, पद्मा बांध बांग्लादेश के अपने हित का मामला है और इस मुद्दे पर भारत से किसी भी प्रकार की चर्चा की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि गंगा जल को लेकर भारत के साथ बातचीत जारी है. अनी ने कहा, गंगा के संबंध में चर्चा आवश्यक है और वह जारी है.

भारत के लिए क्यों अहम है फरक्का बैराज

भारत ने वर्ष 1975 में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज का निर्माण किया था. इसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के पानी को हुगली नदी की ओर मोड़ना था, ताकि हुगली नदी में जमा गाद और गंदगी साफ हो सके और कोलकाता बंदरगाह तक जहाजों की आवाजाही सुचारु बनी रहे. भारत लगातार यह कहता रहा है कि फरक्का बैराज का निर्माण केवल कोलकाता बंदरगाह को बचाने और नदी के प्रवाह को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था.

1996 की गंगा जल संधि का महत्व

भारत और बांग्लादेश के बीच पानी के बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत और समझौते हुए हैं. इनमें 1996 की गंगा जल संधि सबसे अहम मानी जाती है. इस समझौते के तहत दोनों देश गंगा के जल बंटवारे को लेकर सहयोगात्मक तरीके से समाधान निकालते रहे हैं.

क्यों संवेदनशील बना हुआ है फरक्का मुद्दा

बांग्लादेश में फरक्का बैराज का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील माना जाता है. वहां के विशेषज्ञों और सरकारों का मानना है कि सूखे के मौसम में पानी की कमी से नदियों का जलस्तर घट जाता है, जिससे खेती और सिंचाई पर असर पड़ता है. इसके अलावा, बांग्लादेश की एक बड़ी चिंता यह भी है कि नदी में पानी का प्रवाह कम होने से समुद्र का खारा पानी मीठे पानी में मिल रहा है. इससे जमीन की उर्वरता प्रभावित हो रही है और खेती योग्य भूमि पर असर पड़ रहा है.

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