नई दिल्ली: सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. केंद्र सरकार ने कीमती धातुओं के आयात पर कस्टम ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद अब देश में सोना और चांदी महंगे हो सकते हैं. इस फैसले का असर सिर्फ सर्राफा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शेयर बाजार में ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है. सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना और गैर-जरूरी आयात पर नियंत्रण लगाना बताया जा रहा है.
सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी के साथ 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाने का फैसला किया है. इसके बाद इन धातुओं पर कुल प्रभावी आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है. नई दरें मंगलवार रात से लागू कर दी गई हैं. इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है. व्यापारियों का मानना है कि आयात महंगा होने के कारण इसका असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा.
प्लेटिनम और अन्य उत्पाद भी हुए महंगे
सरकार ने सिर्फ सोना और चांदी ही नहीं, बल्कि प्लेटिनम और उससे जुड़े कई उत्पादों पर भी ड्यूटी बढ़ाई है. प्लेटिनम से बने हुक, क्लैप, पिन और अन्य वस्तुओं पर अब 10 प्रतिशत शुल्क देना होगा. इसके अलावा रीसाइक्लिंग के लिए आने वाले ऐसे स्पेंट कैटलिस्ट और राख, जिनमें कीमती धातु मौजूद होती है, उन पर भी कुछ शर्तों के साथ 10 प्रतिशत ड्यूटी लागू कर दी गई है. इसके लिए सरकार ने पुराने कस्टम नियमों में संशोधन किया है.
ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर दबाव
इस फैसले का असर शेयर बाजार में ज्वेलरी सेक्टर पर भी देखने को मिल सकता है. ड्यूटी बढ़ने की खबरें सामने आने के बाद ही कई बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी. टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और सेन्को गोल्ड जैसी कंपनियों के शेयरों में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई. इससे इन कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की कमी आई. निवेशकों को डर है कि सोना महंगा होने से ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो सकती है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता माना जाता है. पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने करीब 72 अरब डॉलर से ज्यादा का सोना आयात किया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक था. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ता आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाता है. बड़ी मात्रा में डॉलर विदेशों में जाने से रुपये की कीमत पर असर पड़ता है और चालू खाता घाटा(CAD) भी बढ़ सकता है.
पीएम मोदी ने की थी अपील
कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी. उन्होंने लोगों से विदेश यात्राएं कम करने, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने और अनावश्यक खर्चों में कटौती करने को भी कहा था. प्रधानमंत्री का कहना था कि यदि देशवासी थोड़ी बचत करें, तो अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा(Forex) बचाई जा सकती है. सरकार का मानना है कि आयात में कमी आने से आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी.
विदेशी मुद्रा बचत को लेकर अलग-अलग राय
आर्थिक विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर मतभेद है कि सोने की खपत घटने से कितनी विदेशी मुद्रा की बचत होगी. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सोने की मांग में 10 प्रतिशत कमी आती है, तो भारत को हर साल करीब 13 अरब डॉलर की बचत हो सकती है. वहीं कुछ अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक बचत इससे कम होगी, क्योंकि आयातित सोने का पूरा हिस्सा घरेलू खपत में इस्तेमाल नहीं होता. हालांकि सभी विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि अत्यधिक सोना आयात देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाता है.