पंजाब पुलिस ने आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से अपने अपराध नियंत्रण और निगरानी तंत्र को एक नई दिशा दी है. पूरे राज्य में हाल ही में शुरू किए गए अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) अब स्मार्ट पुलिसिंग के बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रहे हैं. इन सेंटरों का मकसद आपराधिक गतिविधियों पर लगातार नजर रखना संदिग्धों को ट्रैक करना और पुलिस बल की कार्रवाई करने की क्षमताओं को काफी बढ़ाना है. AI की ताकत को इंसानी सूझबूझ के साथ मिलाकर, पंजाब पुलिस अब सुरक्षित पंजाब के लक्ष्य को और भी ज्यादा असरदार तरीके से हासिल करने की कोशिश कर रही है.
1,700 कैमरों से होगी निगरानी
हाल ही में पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) गौरव यादव ने लुधियाना में एक नए ICCC का उद्घाटन किया. इस प्रोजेक्ट के तहत शहर में 259 जगहों पर लगभग 1,700 हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं. इसके अलावा 46 अलग-अलग जगहों पर एक इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) भी लगाया गया है. यह सेंटर ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम (PCR), सेफ सिटी ऑपरेशन और वायरलेस कम्युनिकेशन जैसी अलग-अलग यूनिट्स को एक साथ जोड़ता है जिससे अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनता है. इस पहल का एक बड़ा फ़ायदा यह हुआ है कि PCR का रिस्पॉन्स टाइम कम हो गया है, जो 15 मिनट से घटकर लगभग 7–8 मिनट रह गया है.
पुलिसिंग में बढ़ा तालमेल और तेजी
ICCC प्रोजेक्ट जालंधर में भी काफी कामयाब साबित हो रहा है. पूरे शहर में कुल 1,007 हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों का एक नेटवर्क बनाया गया है जिसमें 982 फिक्स्ड कैमरे और 15 पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे शामिल हैं. इसके अलावा 10 जगहों पर फेशियल रिकग्निशन सिस्टम लगाए गए हैं और 20 जगहों पर Wi-Fi हॉटस्पॉट लगाए गए हैं.
यह तकनीक पुलिस को अपराधियों की हरकतों को तेजी से ट्रैक करने और डिजिटल सबूत इकट्ठा करने में मदद कर रही है. ICCC ने कई बड़े मामलों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है. उदाहरण के लिए भार्गव कैंप में एक ज्वेलरी स्टोर में हुई हथियारबंद लूट की जांच के दौरान,जिसमें 1 करोड़ रुपये का सोना और 2 लाख रुपये नकद लूटे गए थे, पुलिस ने ICCC की मदद से 12 अलग-अलग चौराहों पर रिकॉर्ड की गई वीडियो फ़ुटेज को एक साथ मिलाकर देखा. इस सिस्टम के जरिए आरोपियों के भागने के रास्तों का पता लगाया गया उनके छिपने की जगहों का पता चला, और चोरी की गई संपत्ति बरामद की गई.
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत गैंगस्टरों पर सख्त कार्रवाई
ICCC ने पूर्व मंत्री और BJP नेता मनोरंजन कालिया के घर पर हुए ग्रेनेड हमले की जांच में भी अहम भूमिका निभाई. जांचकर्ताओं ने संदिग्धों की हरकतों का एक विज़ुअल ट्रेल बनाया जो अपराध की जगह से लेकर जालंधर रेलवे स्टेशन तक फैला हुआ था. CCTV फुटेज के आधार पर एक आरोपी की पहचान की गई फरार होने के दौरान किए गए 3,500 के एक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए चार राज्यों में उसका पीछा किया गया और आखिरकार उसे दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया.
संतोखपुरा गोलीबारी मामले में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों ने हमलावरों की हरकतों को रिकॉर्ड किया. ICCC और निजी CCTV कैमरों की मदद से पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया जिससे दो संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई और हथियार बरामद किए गए. इस बीच, आम आदमी पार्टी के नेता सतविंदरपाल सिंह 'लकी' ओबेरॉय की हत्या के मामले में पहचान विश्लेषण तकनीक ने पुलिस को आरोपियों की पहचान करने में मदद की.
ICCC ने निभाई अहम भूमिका
ICCC की सबसे बड़ी ताकत इसका AI-आधारित ऑटोमेटेड सिस्टम है. यह सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने के लिए लगातार 1,000 से ज्यादा कैमरा फीड को स्कैन करता है. इसकी विशेषताओं में लावारिस चीजों का पता लगाना, गैर-कानूनी भीड़ के जमावड़े का विश्लेषण करना और कैमरे से छेड़छाड़ होने पर तुरंत अलर्ट जारी करना शामिल है.
पुलिस कमिश्नर धनप्रीत रंधावा ने क्या बताया
DGP गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति अपनाती है. उनके अनुसार ICCC जैसी तकनीकें पुलिस को अपराध की जड़ों पर ही प्रहार करने में मदद करने में अहम भूमिका निभाती हैं. साथ ही जालंधर के पुलिस कमिश्नर धनप्रीत रंधावा ने ICCC को शहर का 'दिमाग' बताया और कहा कि यह कच्चे डेटा को कार्रवाई योग्य जानकारी में बदल देता है. AI और मानवीय बुद्धिमत्ता के बीच यह तालमेल पंजाब पुलिस को पुलिसिंग के एक ज्यादा आधुनिक और प्रभावी मॉडल की ओर ले जा रहा है.