रूस ने अपने एडवांस फाइटर जेट 'Su-57' का ट्रायल किया शुरू, भारत को भी प्रोजेक्ट में जोड़ने की कोशिश

रूस ने अपने नए ट्विन-सीटर Su-57 स्टील्थ फाइटर का परीक्षण शुरू कर दिया है. इस विमान को भविष्य के ड्रोन युद्ध के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जबकि भारत को इसमें स्वदेशी सिस्टम और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव भी मिला है.

Date Updated Last Updated : 18 May 2026, 03:37 PM IST
फॉलो करें:
Courtesy: X/@mog_russEN

नई दिल्ली: दुनिया में लड़ाकू विमानों की दौड़ अब सिर्फ स्पीड और हथियारों तक सीमित नहीं रह गई है. अब युद्ध का भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और स्टील्थ टेक्नोलॉजी के इर्द-गिर्द घूम रहा है. इसी बीच रूस ने अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट Su-57 का नया टू-सीटर वेरिएंट टेस्ट करना शुरू कर दिया है. 

खास बात यह है कि यह वही कॉन्सेप्ट है, जिसे भारत कई साल पहले रूस के साथ मिलकर विकसित करना चाहता था. अब रूस ने भारत को इस विमान में भारतीय हथियार और सिस्टम जोड़ने के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी खुला प्रस्ताव दिया है. 

भारत के लिए क्यों खास है नया Su-57?

भारत लंबे समय से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तलाश में है. मौजूदा समय में रूस का Su-57 ही ऐसा विकल्प माना जा रहा है, जिसे भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से हासिल कर सकता है. अमेरिकी F-35 भी एक विकल्प के रूप में देखा जाता है, लेकिन अमेरिका की सख्त शर्तों और वैश्विक राजनीतिक समीकरणों की वजह से उसकी खरीद आसान नहीं मानी जाती.

रूस ने हाल ही में Su-57 के ट्विन-सीटर मॉडल का टैक्सी ट्रायल किया है. यह वही डिजाइन है जिसमें दो लोग बैठ सकते हैं. भारतीय वायुसेना पहले भी चाहती थी कि भविष्य के लड़ाकू विमान में एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर हो, ठीक उसी तरह जैसे Su-30MKI में होता है.

सिर्फ फाइटर जेट नहीं, ‘ड्रोन कमांड सेंटर’ भी

नए Su-57 की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टी-रोल क्षमता मानी जा रही है. यह विमान सिर्फ दुश्मन पर हमला करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हवा में रहते हुए कई ड्रोन को भी नियंत्रित कर सकेगा. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पीछे बैठने वाला अधिकारी ड्रोन ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और मिशन कंट्रोल जैसी जिम्मेदारियां संभाल सकता है. यानी आगे बैठा पायलट विमान उड़ाने और हवाई युद्ध पर ध्यान देगा, जबकि पीछे बैठा मिशन कमांडर ड्रोन स्वार्म और मानव रहित विमानों को निर्देश देगा. आधुनिक युद्ध में इस तरह की तकनीक को बेहद अहम माना जा रहा है.

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर की सेनाएं MUM-T यानी “मैंड-अनमैन्ड टीमिंग” तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं. इसका मतलब है कि एक लड़ाकू विमान के साथ कई ड्रोन भी मिशन में शामिल होंगे और उन्हें उसी विमान से कंट्रोल किया जाएगा. रूस, अमेरिका और चीन इस तकनीक को भविष्य की लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार मान रहे हैं. चीन पहले ही अपने J-20S फाइटर जेट के जरिए इस दिशा में आगे बढ़ चुका है. अब रूस भी Su-57 के जरिए इसी तकनीक को मजबूत करने में जुटा है.

भारत और रूस का पुराना FGFA प्रोग्राम

भारत और रूस पहले FGFA यानी फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम पर साथ काम कर चुके हैं. उस समय भारतीय वायुसेना ने खास तौर पर टू-सीटर वर्जन की मांग की थी ताकि लंबे और जटिल मिशनों में बेहतर समन्वय हो सके. हालांकि बाद में भारत इस परियोजना से अलग हो गया था. इसके पीछे लागत बढ़ना, इंजन प्रदर्शन और तकनीकी साझेदारी से जुड़ी चिंताएं बड़ी वजह मानी गई थीं.

अब रूस एक बार फिर भारत को इस प्रोजेक्ट से जोड़ने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने संकेत दिए हैं कि भारत चाहे तो Su-57 के नए संस्करण में स्वदेशी हथियार, भारतीय एवियोनिक्स और दूसरे सिस्टम भी शामिल किए जा सकते हैं. इसके साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का विकल्प भी पेश किया गया है.

सम्बंधित खबर