पुतिन ने फिर की भारत की तारीफ, बोले- दबाव नहीं, अपने हितों से लेता है फैसले

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की खुलकर सराहना की है. उन्होंने कहा था कि भारत एक भरोसेमंद साझेदार है और वह अंतरराष्ट्रीय दबावों के आधार पर अपने रिश्तों का निर्धारण नहीं करता.

Date Updated Last Updated : 06 June 2026, 11:24 AM IST
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Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की खुलकर सराहना करते नजर आए हैं. अंतरराष्ट्रीय मंच से दिए गए उनके ताजा बयान ने वैश्विक राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. पुतिन ने साफ शब्दों में कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जिसने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है और कभी किसी बाहरी दबाव के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया.

सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के एक अहम सत्र को संबोधित करते हुए पुतिन ने भारत और चीन का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अपने फैसले हमेशा स्वतंत्र रूप से लिए हैं और किसी विदेशी शक्ति के निर्देशों का पालन करने की परंपरा नहीं रही है. रूसी राष्ट्रपति के मुताबिक, किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और उसके स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने कहा कि इस अधिकार को चुनौती देना उचित नहीं है और न ही इसे किसी दबाव के जरिए प्रभावित किया जा सकता है.

लगातार दूसरे दिन भारत के समर्थन में बोले पुतिन

पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने एक दिन पहले भी भारत-रूस संबंधों को लेकर टिप्पणी की थी. उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत एक भरोसेमंद साझेदार है और वह अंतरराष्ट्रीय दबावों के आधार पर अपने रिश्तों का निर्धारण नहीं करता. उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेता है और किसी बाहरी शक्ति के दबाव में आकर अपनी नीतियां नहीं बदलता.

रूस से तेल खरीद को लेकर बढ़ा था विवाद

हाल के वर्षों में रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद देखने को मिले थे. अमेरिकी प्रशासन का मानना था कि रूस को होने वाली आय का उपयोग यूक्रेन युद्ध में किया जा रहा है. इस मुद्दे को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिशें भी हुईं. हालांकि भारत ने बार-बार स्पष्ट किया कि उसकी ऊर्जा जरूरतें और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं. इसी नीति के तहत भारत ने अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए.

रूस को अलग-थलग करने की कोशिशों पर पुतिन का जवाब

फोरम के दौरान जब पुतिन से पूछा गया कि क्या यूक्रेन युद्ध के बाद रूस वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ गया है, तो उन्होंने इस धारणा को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि रूस के दुनिया के कई देशों के साथ मजबूत संबंध बने हुए हैं और उसे अलग-थलग करने की रणनीति सफल नहीं रही. उनके अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में रूस का अंतरराष्ट्रीय सहयोग आज भी जारी है और कई देशों के साथ आर्थिक संबंध पहले की तरह सक्रिय हैं.

पश्चिमी देशों की नीति पर साधा निशाना

रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों की नीतियों पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि रूस के खिलाफ बनाई गई कई रणनीतियां अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं. पुतिन का कहना था कि आर्थिक और व्यापारिक हितों के मामलों में कई देश व्यवहारिक रुख अपनाते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद कुछ क्षेत्रों में सहयोग और व्यापारिक गतिविधियां जारी रहीं.

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