तमिलनाडु में चिकनगुनिया का बढ़ा खतरा, सरकार ने तेज किए बचाव और जांच के कदम

तमिलनाडु के कुछ जिलों में चिकनगुनिया के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसे देखते हुए राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है.

Date Updated Last Updated : 22 January 2026, 10:12 AM IST
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Courtesy: Pinterest

चेन्नई: तमिलनाडु के कुछ जिलों में चिकनगुनिया के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसे देखते हुए राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है. जिला प्रशासन और शहरी स्वास्थ्य विभागों को बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए सतर्क रहने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा मौसम मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है. इसी कारण निगरानी और बचाव के उपाय और तेज करने को कहा गया है. स्वाथ्य विभाग के साथ आम लोगो को भी इससे बचने के उपाय अपनाने होंगे. 

इन जिलों में ज्यादा मामले

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि चेन्नई, विलुपुरम, तेनकासी, थेनी, कुड्डालोर, चेंगलपट्टू, कांचीपुरम और अरियालुर जिलों में चिकनगुनिया के ज्यादा मामले सामने आए हैं. इन इलाकों में मरीजों में तेज बुखार, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, साथ ही ज्यादा कमजोरी जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं.

चिकनगुनिया के बढ़ते मामले को देखते हुए विभाग ने कहा है कि बीमारी की समय को पहचान कर उसका सही इलाज बेहद जरूरी है, ताकि मरीजों की हालत न बिगड़े.

जांच और रिपोर्टिंग पर जोर

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि बुखार वाले इलाकों से ज्यादा से ज्यादा खून के सैंपल लिए जाएं और लैब में जांच कर बीमारी की पुष्टि की जाए. साथ ही, सरकारी और निजी अस्पतालों तथा जांच केंद्रों को समय पर मामलों की जानकारी देने के आदेश भी दिए हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि रिपोर्ट देने में देरी से बीमारी तेजी से फैल सकती है.

अस्पतालों में विशेष इंतजाम

इसके अलाना स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि डेंगू और चिकनगुनिया के लिए बने वार्ड मच्छर मुक्त रखें. मरीजों के लिए पर्याप्त बिस्तर और मच्छरदानी की व्यवस्था भी जरूरी बताई गई है.

साथ ही मंत्रालय ने निगरानी के लिए तय किए गए अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को जांच किट का पर्याप्त स्टॉक रखने को भी कहा है. ताकि इससे अस्पताल में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो साथ ही मरीजों को भी किसी असुविधा का सामना न करना पड़े

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