नई दिल्ली: देश भर में श्रम व्यवस्था को नया रूप देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से नई श्रम संहिताओं को लागू करने की तैयारी में है, जिससे करोड़ों कर्मचारियों और नियोक्ताओं के काम करने के तरीके पर सीधा असर पड़ेगा. यह कदम भारत के श्रम कानूनों को ज्यादा सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड इम्लॉइमेंट द्वारा चारों श्रम संहिताओं के नियमों को अंतिम रूप दिया जा चुका है और अब मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस की मंजूरी के बाद इन्हें घोषित किया जा सकता है. इन संहिताओं में मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, इंडस्ट्रियल संबंध और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े कुल 44 पुराने कानूनों को एकीकृत कर सरल ढांचे में लाया गया है.
नए लेबर लॉ कोड के अनुसार रोजाना 8 घंटे और हफ्ते में कुल 48 घंटे का कार्य समय बरकरार रहेगा. हालांकि, कंपनियों को अब कार्य समय में लचीलापन देने की छूट मिलेगी. इससे कर्मचारियों को जरूरत के अनुसार काम करने का विकल्प मिलेगा, जबकि ओवरटाइम को भी ज्यादा व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाएगा.
सरकार का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है. असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स और स्व-रोजगार करने वाले लोगों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. इससे करोड़ों कामगारों को भविष्य में पेंशन, बीमा और अन्य लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी.
नई श्रम संहिताओं में कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है. सभी कर्मचारियों को जॉइनिंग लेटर देना अनिवार्य होगा, जिससे रोजगार की पारदर्शिता बढ़ेगी. साथ ही, समान काम के लिए समान वेतन और महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में काम करने के अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे.
ओवरटाइम को अब स्पष्ट नियमों के तहत लागू किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को अतिरिक्त काम के लिए उचित भुगतान मिल सके. इसके अलावा, 40 वर्ष से ज्यादा आयु के कर्मचारियों के लिए सालाना स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी दी जाएगी.