Ram Navami 2026: इस दिन मनाया जाएगा राम नवमी, 11:15 से दोपहर 1:43 तक शुभ मुहूर्त; पारंपरिक भोग

हिंदू धर्म में राम नवमी का विशेष महत्व है. यह भगवान राम के जन्मदिवस का प्रतीक माना जाता है और चैत्र नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मनाया जाता है. इस अवसर पर भगवान को प्रसन्न करने और भोग लगाने के लिए के लिए पांच पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं.

Date Updated Last Updated : 23 March 2026, 02:57 PM IST
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Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में राम नवमी का विशेष महत्व है. यह भगवान राम के जन्मदिवस का प्रतीक माना जाता है और चैत्र नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मनाया जाता है. ये दिन देवी सिद्धिदात्री को समर्पित है, जो देवी दुर्गा का नौवां रूप हैं. राम नवमी चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है. 

राम भक्तों के लिए राम नवमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और उल्लास का अवसर होता है. यह दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्म का प्रतीक है और पूरे देश में भक्ति, पूजा और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है. इस खास दिन पर मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और घर-घर में धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है. तो इस अवसर पर भगवान को प्रसन्न करने और भोग लगाने के लिए के लिए पांच पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं.

राम नवमी 2026 की सही तिथि

साल 2026 में नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह लगभग 11:46 बजे शुरू होगी और 27 मार्च को सुबह तक रहेगी. इसलिए 26 मार्च को मुख्य रूप से राम नवमी मनाई जाएगी, जबकि उदय तिथि के आधार पर 27 मार्च को भी पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाएगा.

पूजा का शुभ मुहूर्त

26 मार्च को पूजा का समय सुबह 11:15 बजे से दोपहर 1:43 बजे तक रहेगा. इसी तरह 27 मार्च को भी लगभग यही समय शुभ माना जा रहा है. वहीं दोपहर में भगवान राम के जन्म का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है.

व्रत और पूजा परंपरा

इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार फलाहार या एक समय भोजन करते हैं. व्रत के दौरान सात्विक आहार जैसे फल, दूध और सेंधा नमक से बना भोजन ग्रहण किया जाता है. कई घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है, जो नवरात्रि की महत्वपूर्ण परंपरा है. राम नवमी के अवसर पर खास तौर पर लगभग हर घर में हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनता है.

पारंपरिक प्रसाद

राम नवमी पर खासतौर पर काले चने, सूजी का हलवा और पूरी का प्रसाद तैयार किया जाता है. इसके अलावा खीर और दही भल्ले भी बनाए जाते हैं, जिन्हें भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है.

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