पंजाब: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज तख्त श्री केसगढ़ साहिब में माथा टेकने के बाद पूरे उत्साह के साथ 'शुक्राना यात्रा' शुरू की. कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा परमात्मा का शुक्राना करने के लिए की जा रही है, जिसने उन्हें जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर प्रदान किया.
सोशल मीडिया पर सीएम का संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, "जिस पवित्र धरती पर खालसा पंथ प्रकट हुआ था, उससे 'शुक्राना यात्रा' शुरू हुई है. बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की पवित्र जिम्मेदारी हमें बख्शने के लिए गुरु साहिब के चरणों में शुक्राना किया जा रहा है. पंजाब की शांति और 'सर्बत्त के भला' के लिए अरदासें जारी रहेंगी."
गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी पर सख्त रुख
पवित्र तख्त साहिब में माथा टेकते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मेरा रोम-रोम परमात्मा का ऋणी है कि उसने मुझे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन) एक्ट 2026 लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर बख्शा. हम भाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक कानून को पास करने की जिम्मेदारी मिली, जो भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को खत्म करने में मददगार होगा."
उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी एक गहरी साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य पंजाब की शांति, भाईचारक सौहार्द और एकता को तोड़ना था. यह एक्ट सुनिश्चित करेगा कि इस अक्षम्य अपराध के दोषी किसी भी सूरत में माफ नहीं किए जाएंगे और उन्हें अनुकरणीय सजा दी जाएगी.
सिख आस्था और गुरु ग्रंथ साहिब की रक्षा
मुख्यमंत्री ने सिखों की श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के साथ आध्यात्मिक साझ पर जोर देते हुए कहा, "श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के लिए पिता के समान हैं और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है. दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी प्रकट कर रहे हैं और धन्यवाद कर रहे हैं."
शुक्राना यात्रा का कार्यक्रम
शुक्राना यात्रा के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि श्री आनंदपुर साहिब के बाद वे 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में नतमस्तक होंगे.
"मैं गुरु साहिब का विनम्र सेवक"
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "हम तो एक माध्यम हैं, जिसे गुरु साहिब ने यह पवित्र जिम्मेदारी निभाने के लिए चुना है. मैं इस एक्ट को पास करने वाला कोई नहीं हूं. गुरु साहिब ने खुद यह सेवा मुझसे ली है." उन्होंने कहा कि परमात्मा ऐसी सेवा सिर्फ उन्हीं को सौंपता है, जिन्हें वह खुद चुनता है.
कानून का उद्देश्य और राजनीतिक आरोपों का जवाब
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समाज के सभी वर्ग लंबे समय से बेअदबी रोकने के लिए ऐसे कानून की मांग कर रहे थे। इस एक्ट का एकमात्र उद्देश्य पिछली सरकारों की लापरवाही से आहत लोगों की भावनाओं को शांत करना है और इसमें कोई राजनीतिक मंतव्य नहीं है.
उन्होंने कुछ लोगों द्वारा विरोध पर कहा कि वे सिर्फ इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके राजनीतिक आका नाखुश हैं. "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग अपने निजी हितों के लिए इस पवित्र मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं."
लोकसभा कार्यकाल और छोटे साहिबजादों की याद
लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए सीएम मान ने कहा कि उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ मिलकर छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने का मुद्दा सदन में सफलतापूर्वक उठाया था. उन्होंने कहा कि मुझसे पहले 190 से अधिक सांसदों ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन किसी ने भी यह मुद्दा नहीं उठाया.
आनंदपुर साहिब का ऐतिहासिक महत्व
श्री आनंदपुर साहिब के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसी पवित्र धरती पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ की स्थापना की थी. उसी दिन उनकी सरकार ने बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पास किया.
विधानसभा विशेष सत्र और पवित्र शहरों को दर्जा
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350 साला शहीदी दिवस पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र श्री आनंदपुर साहिब में बुलाया गया. इस दौरान अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब को पवित्र शहर का दर्जा देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया.
पंजाब में सिखी के पांच तख्तों का महत्व
पंजाब में सिखी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए सीएम मान ने कहा कि सिखों के पांच तख्तों में से तीन (श्री अकाल तख्त साहिब, श्री दमदमा साहिब और तख्त श्री केसगढ़ साहिब) पंजाब में हैं. इन शहरों के समग्र विकास के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी. यह यात्रा गुरु ग्रंथ साहिब की गरिमा की रक्षा और पंजाब में शांति बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.