इन 4 मंदिरों का प्रसाद है दुनिया भर में मशहूर, स्वाद और परंपरा का ऐसा संगम जिसे भक्त कभी नहीं भूलते

श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ उस प्रसाद का स्वाद भी जरूर चखना चाहते हैं, जिसकी चर्चा देशभर में होती है। हिंदू परंपरा में प्रसाद को महज भोजन नहीं, बल्कि भगवान का आशीर्वाद माना जाता है।

Date Updated Last Updated : 01 August 2026, 03:21 PM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: भारत में मंदिरों की पहचान केवल उनकी प्राचीन परंपराओं, चमत्कारों और आस्था से नहीं जुड़ी है, बल्कि कुछ तीर्थ ऐसे भी हैं जहां प्रसाद अपने आप में एक खास आकर्षण बन चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ उस प्रसाद का स्वाद भी जरूर चखना चाहते हैं, जिसकी चर्चा देशभर में होती है। हिंदू परंपरा में प्रसाद को महज भोजन नहीं, बल्कि भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। पहले इसे भोग के रूप में अर्पित किया जाता है और फिर श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। यही वजह है कि कई मंदिरों का प्रसाद अपनी अनोखी परंपरा, स्वाद और बनाने की विशेष विधि के कारण अलग पहचान रखता है।

जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर की विशाल रसोई में मिट्टी के बर्तनों को एक के ऊपर एक रखकर भोजन पकाने की सदियों पुरानी परंपरा आज भी निभाई जाती है। चावल, दाल, सब्जियां, खिचड़ी, करी और कई तरह की मिठाइयों से सजा यह प्रसाद 'अभाडा' के नाम से जाना जाता है। 

तिरुपति लड्डू

अगर मंदिरों के सबसे लोकप्रिय प्रसाद की बात हो तो तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर का तिरुपति लड्डू सबसे पहले याद आता है। बेसन, घी, चीनी, काजू और किशमिश से तैयार होने वाला यह लड्डू अपने खास स्वाद के साथ-साथ अपनी पहचान के लिए भी प्रसिद्ध है। इसे GI टैग मिल चुका है। 

पलानी का पंचामृतम्

तमिलनाडु के पलानी स्थित मुरुगन मंदिर का पंचामृतम् अलग पहचान रखता है। इसे बनाने में केला, गुड़, शहद, खजूर, किशमिश और इलायची का उपयोग किया जाता है। दक्षिण भारत में ही केरल के अंबालाप्पुझा श्रीकृष्ण मंदिर की पालपायसम खीर भी श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। दूध, चावल और चीनी को धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाकर तैयार की जाने वाली यह खीर अपनी गाढ़ी बनावट और हल्की कैरमल जैसी मिठास के लिए जानी जाती है।

श्रीनाथजी मंदिर की मठाड़ी

राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर का प्रसाद मंदिर की समृद्ध भोग परंपरा की झलक दिखाता है। यहां मिलने वाली मठाड़ी विशेष रूप से श्रद्धालुओं के बीच पसंद की जाती है। चीनी की चाशनी में डूबी यह कुरकुरी तली हुई मिठाई वर्षों से भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग का हिस्सा रही है। स्वाद और परंपरा का यह संगम श्रद्धालुओं को बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करता है। यही कारण है कि इन मंदिरों का प्रसाद केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध पाक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं का भी अनमोल हिस्सा माना जाता है।

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