नीरज के बाद अब यशवीर का जलवा! कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता पहला अंतरराष्ट्रीय पदक

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने पुरुष जैवलिन थ्रो में दो पदक जीते. नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. वहीं युवा एथलीट यशवीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

Date Updated Last Updated : 01 August 2026, 02:10 PM IST
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Courtesy: X/@BYRBJP

नई दिल्ली: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुष भाला फेंक स्पर्धा भारत के लिए कई मायनों में खास रही. भले ही नीरज चोपड़ा गोल्ड मेडल नहीं जीत सके, लेकिन उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. वहीं, युवा एथलीट यशवीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. मुकाबले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा नीरज चोपड़ा के उस बयान की रही, जिसमें उन्होंने अपने पदक से ज्यादा यशवीर की उपलब्धि को अहम बताया. उनके शब्दों ने न सिर्फ खेल भावना दिखाई, बल्कि भारतीय जैवलिन थ्रो के उज्ज्वल भविष्य की भी झलक दी.

फाइनल मुकाबले में श्रीलंका के युवा खिलाड़ी रुमेश पाथिरागे ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर गोल्ड मेडल जीता. भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया. वहीं, यशवीर सिंह ने आखिरी प्रयास में कमाल करते हुए 85.41 मीटर का थ्रो किया और कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में दूसरा मेडल डाल दिया.

यशवीर की सफलता पर नीरज ने जताई खुशी

मुकाबले के बाद नीरज चोपड़ा ने कहा कि यशवीर सिंह के साथ पोडियम साझा करना उनके लिए बेहद गर्व का पल था. उन्होंने बताया कि उन्हें एशियन गेम्स की याद आ गई, जब उन्होंने और किशोर जेना ने एक साथ भारत के लिए पदक जीते थे. नीरज के मुताबिक, यशवीर ने सबसे अहम समय पर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जो उनकी मानसिक मजबूती और मेहनत को दिखाता है.

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय भाला फेंक का भविष्य काफी मजबूत नजर आ रहा है. साथ ही उन्होंने अपने प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए कहा कि कठिन मौसम और तेज हवाओं के बावजूद उन्होंने इस सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया, जिससे उन्हें आगे आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए आत्मविश्वास मिला है.

आखिरी थ्रो ने बदल दी पूरी कहानी

कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा ले रहे यशवीर सिंह ने मुकाबले का सबसे रोमांचक पल अपने नाम किया. शुरुआती पांच प्रयासों तक वह पदक की दौड़ में पीछे चल रहे थे. उनके थ्रो उम्मीद के मुताबिक नहीं जा रहे थे और वह लगातार दबाव में थे. लेकिन छठे और अंतिम प्रयास में उन्होंने पूरी ताकत के साथ भाला फेंका, जो 85.41 मीटर दूर जाकर गिरा. यह उनके करियर का नया व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (पीबी) भी बना. इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 83.72 मीटर था. इस एक प्रयास ने न सिर्फ उन्हें ब्रॉन्ज मेडल दिलाया, बल्कि कई बड़े खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया.

खुद यशवीर ने बताया आखिरी प्रयास का राज

मुकाबले के बाद यशवीर सिंह ने कहा कि पहले पांच प्रयासों में उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था. उनका भाला करीब 81 मीटर तक ही जा रहा था. उन्होंने स्कोरबोर्ड देखा तो समझ आया कि कांस्य पदक के लिए 82 मीटर से ज्यादा दूरी की जरूरत है. यशवीर ने बताया कि उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और आखिरी प्रयास में पूरी ताकत लगा दी. उसी थ्रो ने उन्हें पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक दिला दिया. उन्होंने कहा कि यह पल उनके करियर का सबसे यादगार अनुभव बन गया.

हरियाणा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

हरियाणा के रहने वाले यशवीर सिंह ने जूनियर स्तर पर ही अपनी प्रतिभा दिखा दी थी. साल 2022 में इंडियन अंडर-20 फेडरेशन कप के दौरान उन्होंने नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड तोड़कर पहली बार सुर्खियां बटोरी थीं. इसी प्रतियोगिता में उन्होंने पहली बार 80 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका था.

इसके बाद उन्होंने 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 82.57 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पांचवां स्थान हासिल किया. ताशकंद में आयोजित जी अर्जुमानोव मेमोरियल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर भी उन्होंने अपनी क्षमता साबित की. हालांकि उसी साल कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में वह फाइनल तक भी नहीं पहुंच सके.

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