भारत का गोल्डन मोमेंट! दिलीप गावित ने CWG 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर लहराया तिरंगा

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा एथलीट दिलीप गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. वहीं मोहम्मद बासिल ने रजत पदक जीतकर भारत को डबल खुशी दिलाई और देश के पदकों की संख्या में इजाफा किया.

Date Updated Last Updated : 30 July 2026, 12:40 PM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा एथलीट दिलीप गावित ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के नाम एक और स्वर्ण पदक दर्ज करा दिया. पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. यह समय उनका सीजन बेस्ट और नया रिकॉर्ड भी साबित हुआ. उनकी इस ऐतिहासिक जीत ने भारत के पदक अभियान को नई मजबूती दी

भारत को मिला गोल्ड और सिल्वर का डबल तोहफा

दिलीप गावित की शानदार जीत के कुछ ही समय बाद भारत के मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने भी शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने 10.83 सेकंड का समय लेकर रजत पदक जीता. एक ही स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों का पोडियम पर पहुंचना भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

इस जीत के साथ भारत के खाते में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का तीसरा स्वर्ण पदक जुड़ गया. इससे पहले मीराबाई चानू और शर्मिला धनखड़ भी गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. भारत अब पदक तालिका में तीन स्वर्ण, नौ रजत और तीन कांस्य पदकों के साथ शीर्ष-10 देशों में शामिल है.

गुरु को समर्पित किया स्वर्ण पदक

जीत के बाद दिलीप गावित ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच वैजनाथ काले को दिया. उन्होंने बताया कि शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन बाद में उन्होंने गति पकड़ ली और जीत हासिल की.

दिलीप ने कहा कि उनका मुख्य इवेंट 400 मीटर है, लेकिन 100 मीटर दौड़ का भी उन्होंने भरपूर आनंद लिया. उन्होंने बताया कि वह महाराष्ट्र के नासिक जिले के एक छोटे से गांव से आते हैं और पहले खेती का काम करते थे. उनके कोच ने उनकी प्रतिभा पहचानकर उन्हें प्रशिक्षण के लिए नासिक बुलाया और हर तरह से सहयोग किया. गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने इस स्वर्ण पदक को अपने गुरु के नाम समर्पित किया.

संघर्ष से सफलता तक का सफर

कोच वैजनाथ काले ने बताया कि उन्होंने स्कूल के दिनों में ही दिलीप की दौड़ने की क्षमता को पहचान लिया था. शुरुआत में उन्हें दिलीप के माता-पिता को प्रशिक्षण के लिए मनाना पड़ा. उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं नहीं होने के कारण दिलीप का बायां हाथ काटना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

देश के लिए प्रेरणा बने दिलीप

दिलीप गावित की यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने दुनिया के मंच पर भारत का तिरंगा लहराया. उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी.

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