नई दिल्ली: नोएडा की सड़कों पर सोमवार सुबह ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे इंडस्ट्रियल सेक्टर को हिला दिया. मजदूरों का गुस्सा अचानक उबाल पर आ गया , जिस कारण वह सड़को पर उतर आए. धीरे-धीरे स्थिती ऐसी हो गई कि आम लोगों और गाड़ियों का सड़कों पर निकलना तक मुश्किल हो गया.
सड़कें जाम हो गईं, गाड़ियों में आग लगा दी गई. सैलेरी बढ़ाने और काम की शर्तों को लेकर शुरू हुआ यह विरोध कुछ ही समय में हिंसक रूप ले बैठा. यह घटना नोएडा के फेज-2 औद्योगिक इलाके की है, जहां बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां स्थित हैं. सोमवार सुबह सैकड़ों मजदूर सड़कों पर उतर आए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने लगे. स्थिति तब बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों और अन्य गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया और पत्थरबाजी शुरू कर दी.
मजदूरों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों का कहना है कि उनकी मासिक आय 15,000 रुपये से भी कम है, जो मौजूदा महंगाई में पर्याप्त नहीं है. उनका दावा है कि उन्हें रोजाना 10-12 घंटे तक काम करना पड़ता है. इस कारण वह 8 घंटे की शिफ्ट की मांग कर रहे हैं साथ ही ओवरटाइम के भुगतान की भी मांग हो रही है.
महिलाओं की सुरक्षा और सुविधाओं पर भी उठे सवाल
कई महिला श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें वर्कप्लेस पर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलतीं. उनका कहना है कि समय पर खाना नहीं दिया जाता और सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे काम करना और मुश्किल हो जाता है. उन्होंने अपनी सेफ्टी को लेकर आवाज उठाई है.
हरियाणा का असर
दिल्ली और नोएडा के पड़ोसी राज्य हरियाणा में हाल ही में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाए जाने के फैसले ने नोएडा के मजदूरों के गुस्से को और बढ़ा दिया है. वहां अनस्किल्ड और सेमी स्किल्ड श्रमिकों की सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी हुई है, जिससे नोएडा के कामगार खुद को छोटा महसूस कर रहे हैं. उनका सवाल है कि समान काम के बावजूद उन्हें कम वेतन क्यों मिल रहा है.
बढ़ती महंगाई बनी बड़ी वजह
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गैस सिलेंडर, किराया, बच्चों की पढ़ाई हर चीज महंगी हो चुकी है, लेकिन उनकी आय में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई. ऐसे में 13-15 हजार रुपये में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है. इस कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.