बंगाल से लौटने लगे बांग्लादेशी घुसपैठिए? होल्डिंग सेंटर के डर से मचा खौफ

पश्चिम बंगाल में घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ संभावित कार्रवाई की चर्चाओं के बीच कई बांग्लादेशी परिवारों के सीमा की ओर लौटने की खबरें सामने आ रही हैं. होल्डिंग सेंटर और गिरफ्तारी के डर ने वर्षों से बंगाल में रह रहे लोगों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है.

Date Updated Last Updated : 28 May 2026, 11:14 AM IST
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Courtesy: ChatGPT

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट बॉर्डर पर पिछले दो दिनों से असामान्य हलचल देखने को मिल रही है. सीमा की ओर बढ़ते लोगों के चेहरों पर डर और बेचैनी साफ दिखाई दे रही है. महिलाओं के हाथों में जल्दबाजी में बांधे गए छोटे बैग और बच्चों की आंखों में अनिश्चितता का भाव इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना रहा है.

बताया जा रहा है कि राज्य में घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ संभावित सख्त कार्रवाई की चर्चाओं के बाद कई बांग्लादेशी परिवार बंगाल छोड़ने को मजबूर हो गए हैं. खासतौर पर होल्डिंग सेंटर बनाए जाने की खबरों ने अवैध रूप से रह रहे लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है.

होल्डिंग सेंटर के डर से बढ़ी घबराहट

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों की पहचान अवैध घुसपैठिए के रूप में हो रही है, उन्हें सीमा पार भेजे जाने की आशंका जताई जा रही है. इसी डर की वजह से कई परिवार रातोंरात सीमा की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं.

इससे पहले एसआईआर और देश के अन्य राज्यों में घुसपैठियों के खिलाफ हुई कार्रवाई के दौरान भी इसी तरह की स्थिति सामने आई थी.

वर्षों से बंगाल में रह रहे थे कई परिवार

सीमा की ओर लौट रहे लोगों में ऐसे परिवार भी शामिल हैं, जो पिछले कई वर्षों से बंगाल के अलग-अलग इलाकों में रह रहे थे.

कोलकाता, बारासात, दमदम और हावड़ा जैसे शहरों में इनमें से कई लोग रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू सहायिका और छोटे कारखानों में काम कर रहे थे. समय के साथ उन्होंने इन शहरों में अपनी एक छोटी दुनिया बसा ली थी.

देर रात सीमा की ओर पहुंच रहे लोग

सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों के मुताबिक, देर रात से सुबह तक छोटे-छोटे समूहों में लोग बॉर्डर की तरफ पहुंच रहे हैं.

28 वर्षीय नसीम मोल्ला ने बताया, "पहले लगा कि सिर्फ कागज चेक होंगे, लेकिन अब फैक्ट्री मालिक भी कह रहा है कि कुछ दिन गायब हो जाओ. हम गरीब लोग हैं, जेल नहीं जाना चाहते."

नसीम के अनुसार, वह कोलकाता के एक चमड़ा कारखाने में काम करता था.

स्थानीय लोगों ने क्या कहा?
सीमा से लगे गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले एक साल में यह दूसरा मौका है जब अचानक बड़ी संख्या में लोग सीमा की ओर लौटते नजर आ रहे हैं.

42 वर्षीय अब्दुल करीम ने कहा, "दस साल पहले मजदूरी करने आया था. यहां आधार, वोटर और यहां तक कि राशन कार्ड भी बन गया, वोट भी दिए थे, लेकिन अब माहौल बदल गया है."

बढ़ती चर्चाओं से बना डर का माहौल

राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई की चर्चाओं ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है.

इसी वजह से अवैध रूप से रह रहे लोगों के बीच गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने का डर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है.

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