रायपुर में देवकीनंदन ठाकुर का संदेश: पद नहीं, निस्वार्थ सेवा ही इंसान की असली पहचान

रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ी. अपने प्रवचन में देवकीनंदन ठाकुर ने ध्रुव और राजा बलि की कथाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि ईश्वर की भक्ति के लिए किसी विशेष आयु की आवश्यकता नहीं होती.

Date Updated Last Updated : 12 July 2026, 01:39 PM IST
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Courtesy: JBT

नई दिल्ली: रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ी. इस दौरान प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने अपने प्रवचन में भक्ति, सेवा, संस्कार और जीवन मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला. कथा के दौरान उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्व निस्वार्थ सेवा का होता है और ईश्वर द्वारा दिया गया हर अवसर समाज के हित में उपयोग किया जाना चाहिए.

कथा में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा भी शामिल हुईं. उन्होंने व्यासपीठ पर पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त किया और श्रद्धालुओं के साथ कथा का श्रवण किया, जहां आयोजन समिति के सदस्यों ने उनका स्वागत किया. 

'नो तिलक, नो एंट्री' नियम लागू 

आयोजन समिति के संयोजक योगेश अग्रवाल ने बताया कि कथा स्थल पर अनुशासन बनाए रखने के लिए "नो तिलक, नो एंट्री" का नियम लागू किया गया है. श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था का सम्मान करते हुए पूरी श्रद्धा के साथ इसका पालन किया. उनका कहना था कि इस पहल का उद्देश्य सनातन परंपराओं और धार्मिक संस्कारों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है.

अपने प्रवचन में देवकीनंदन ठाकुर ने ध्रुव और राजा बलि की कथाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि ईश्वर की भक्ति के लिए किसी विशेष आयु की आवश्यकता नहीं होती. उन्होंने कहा कि बचपन से ही बच्चों को सत्संग, सेवा और धार्मिक संस्कारों से जोड़ना चाहिए, क्योंकि यही संस्कार आगे चलकर उनके व्यक्तित्व का आधार बनते हैं.

अहंकार ने बचने की दी सीख 

इसके साथ ही उन्होंने अहंकार से बचने की भी सीख दी और कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है. इसलिए जीवन में सत्य, दया, सेवा और सदाचार को अपनाना ही सच्चे धर्म का पालन है. उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक ज्ञान है, जो व्यक्ति को आत्मिक शांति और संतुलन प्रदान करता है.

14 जुलाई तक रहेगा आयोजन 

कथावाचक ने यह भी कहा कि लोग मनोरंजन के लिए समय निकाल लेते हैं, लेकिन आध्यात्मिक गतिविधियों को अक्सर पीछे छोड़ देते हैं. अगर सत्संग और भक्ति को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए, तो मानसिक शांति और संतोष दोनों प्राप्त हो सकते हैं. आयोजकों के अनुसार, श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 14 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में जारी रहेगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है.

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