आगरा: आगरा में एक गुमशुदगी की साधारण लगने वाली घटना ने सबके होश उड़ा दिए हैं. इस घटना ने जब अपनी परतें खोलनी शुरू कीं, तो उसके पीछे छिपी कहानी बेहद भयावह निकली. अधजली लाश, शराब की बोतलों पर लगे क्यूआर कोड और एक सुनियोजित साजिश इन सभी सुरागों ने मिलकर एक ऐसे हत्या कांड का खुलासा किया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया.
यह मामला 1 अप्रैल की रात का है, जब आगरा के सैयां क्षेत्र में एक अधजला शव मिला. शव का चेहरा पूरी तरह जल चुका था, जिससे उसकी में पहचान मुश्किल हो रही थी, लेकिन हाथ पर बने टैटू ने पुलिस को अहम सुराग दिया. टैटू पर ‘लोकेंद्र’ नाम लिखा था. अगले ही दिन मृतक के भाई ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि लोकेंद्र आखिरी बार महेश प्रजापति के साथ देखा गया था.
एफआईआर दर्ज कराने और लाश के मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत आनन फानन में जांच शुरु कर दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पांच अलग-अलग टीमें गठित कीं. घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. पुलिस को मौके से शराब की बोतलें और कुछ कागज के टुकड़े मिले, जो आगे चलकर जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए.
जांच के दौरान पुलिस ने स्थानीय दुकानदारों से पूछताछ की. कागज के टुकड़ों के आधार पर एक फल विक्रेता तक पहुंच बनाई गई, जो ग्राहकों को सामान इसी तरह के कागज में देता था. वहीं, शराब की बोतलों पर मौजूद क्यूआर कोड ने खरीदारी की जानकारी देने में मदद की. इन तकनीकी और स्थानीय सुरागों के आधार पर संदिग्धों की पहचान संभव हो सकी और पुलिस उन तक पहुंच सकी.
पूछताछ में सामने आया कि महेश प्रजापति का मृतक की पत्नी के साथ लंबे समय से संबंध था. हाल ही में लोकेंद्र को इस रिश्ते का पता चल गया था, जिससे विवाद बढ़ गया. इसी के बाद पत्नी और उसके प्रेमी ने मिलकर हत्या की योजना बनाई.
घटना वाले दिन, जैसे ही लोकेंद्र घर से निकला, उसकी पत्नी ने महेश को सूचना दी. महेश ने रास्ते में उसे रोककर शराब पीने के लिए राजी कर लिया. उनके साथ धर्मवीर भी शामिल हो गया. तीनों एक खेत में पहुंचे, जहां शराब पीने के दौरान महेश और धर्मवीर ने कथित रूप से लोकेंद्र का गला दबा दिया. बेहोश होने के बाद उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई, ताकि पहचान छिपाई जा सके.