कल्याण-डोम्बिवली में बड़ा राजनीतिक मोड़, एमएनएस ने थामा एकनाथ की शिवसेना का हाथ

कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम चुनाव के बाद एमएनएस ने शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया है. पांच एमएनएस पार्षदों के साथ शिवसेना की संख्या 58 पहुंच गई है, जबकि बहुमत के लिए अभी चार सीटों की जरूरत है.

Date Updated Last Updated : 21 January 2026, 04:06 PM IST
फॉलो करें:
Courtesy: Pinterest

ठाणे: कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (केडीएमसी) के चुनाव नतीजों के बाद स्थानीय राजनीति में एक अहम मोड़ देखने को मिला है. आमतौर पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने इस बार शिवसेना के समर्थन का फैसला किया है. इस निर्णय को नगर निगम की सत्ता संरचना के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

एमएनएस के पूर्व विधायक प्रमोद (राजू) पाटिल ने जानकारी दी कि पार्टी के पांचों पार्षद शिवसेना के साथ खड़े रहेंगे. उन्होंने बताया कि यह फैसला शहर के विकास और स्थिर प्रशासन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. एमएनएस पार्षदों ने नवी मुंबई स्थित कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय में अपनी औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा की.

शिवसेना की स्थिति मजबूत

इससे पहले दिन की शुरुआत में शिवसेना के सभी 53 पार्षदों ने उसी कार्यालय में अपने गुट का आधिकारिक पंजीकरण कराया था. 122 सदस्यीय केडीएमसी में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. उसके बाद भाजपा 50 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. चुनाव परिणामों में शिवसेना (यूबीटी) को 11, एमएनएस को पांच, कांग्रेस को दो और एनसीपी (एसपी) को एक सीट मिली है.

बहुमत का गणित

नगर निगम में सत्ता बनाने के लिए कम से कम 62 पार्षदों का समर्थन जरूरी होता है. फिलहाल शिवसेना के 53 पार्षदों के साथ एमएनएस के पांच पार्षद जुड़ने से कुल संख्या 58 तक पहुंच गई है. यानी बहुमत से अभी चार सीटें कम हैं. हालांकि सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के 11 पार्षदों में से कुछ शिंदे गुट की शिवसेना के संपर्क में बताए जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में समीकरण और बदल सकता है.

महायुति की भूमिका

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि एमएनएस ने शहर के विकास को प्राथमिकता देते हुए शिवसेना को समर्थन दिया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना और भाजपा ने महायुति गठबंधन के तहत नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ा था. उनके अनुसार, केडीएमसी में महापौर महायुति से ही होगा

भाजपा की ओर से महापौर पद के लिए ढाई साल के कार्यकाल की मांग सामने आ रही है. ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिवसेना अब दो विकल्पों पर विचार कर रही है- या तो अकेले सरकार बनाने की कोशिश करे या फिर गठबंधन में अपनी स्थिति को और मजबूत करे. बताया जा रहा है कि महापौर पद को लेकर अंतिम फैसला उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा संयुक्त रूप से लिया जाएगा.

सम्बंधित खबर

Recent News