नई दिल्लीः भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को एक बड़ा बयान दे दिया है. इस बयान के बाद पूरे भारत में हलचल मच गई. उन्होंने कहा कि भारत ने 1954 में तिब्बत को चीन का हिस्सा माना था. यह बयान उत्तराखंड के देहरादून में इंडिया हिमालयन स्ट्रैटेजी फोरम में दिया. साथ ही जवाहरलाल नेहरू के फैसले और पंचशील समझौते पर जोर दिया, जो भारत-चीन संबंधों की शुरुआत में बहुत ज़रूरी थे.
1954 में भारत और चीन ने पंचशील समझौते पर साइन किए, जिसमें पांच सिद्धांत थे. एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व. जनरल चौहान ने कहा कि भारत का मानना था कि इस समझौते से उत्तरी सीमा का मुद्दा सुलझ गया. नेहरू को लगा कि इससे सीमा पर स्थिरता आएगी, लेकिन चीन का मानना था कि यह समझौता सिर्फ़ व्यापार के लिए था और इसका सीमा पर कोई असर नहीं पड़ा.
🔻🇮🇳 CDS General Anil Chauhan Exposes Nehru's Blunders pic.twitter.com/U1knmW6vuG
— Mintu Prasad (@mintu_prasad20) February 13, 2026
देहरादून में एक इवेंट में बोलते हुए चौहान ने कहा कि आजादी के बाद जब अंग्रेज चले गए, तो भारत को अपनी सीमाएं तय करनी पड़ीं. उन्होंने कहा कि नेहरू को पूरब में मैकमोहन लाइन के बारे में पता था, जो ब्रिटिश इंडिया और तिब्बत के बीच 890 किलोमीटर का बॉर्डर था. उन्हें लद्दाख पर भारत के दावों के बारे में भी पता था, लेकिन उन्होंने अच्छे रिश्ते बनाए रखने के लिए पंचशील पर जोर दिया. चीन ने 1949 में अपनी क्रांति के बाद तिब्बत पर कब्ज़ा कर लिया और ल्हासा तक पहुंच गया. चीन भी इस इलाके में शांति चाहता था, जिसके चलते यह समझौता हुआ.
जनरल चौहान ने कहा कि जब चीन ने तिब्बत पर कब्ज़ा कर लिया और भारत ने इसे मान लिया, तो भारत और तिब्बत के बीच हिमालय का बफर खत्म हो गया. अब भारत-चीन का सीधा बॉर्डर है. भारत ने यूनाइटेड नेशंस में परमानेंट सीट के लिए भी चीन का सपोर्ट किया था.