सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा हिमंत बिस्वा से जुड़े शूटिंग वीडियो का मामला, याचिकाकर्ताओं में पूर्व LG और 12 सामाजिक कार्यकर्ता शामिल

दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने 12 सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है. इस याचिका में संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर नफरत फैलाने और गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया गया है.

Date Updated Last Updated : 09 February 2026, 09:56 PM IST
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नई दिल्लीः चुनाव के माहौल के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा गंभीर मुश्किल में फंसते दिख रहे हैं. उनसे जुड़ा कथित शूटिंग वीडियो विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने 12 सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है. उसमें संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर नफरत फैलाने और गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया गया है. आरोप है कि बिस्वा सरमा सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों और राज्यपालों के साथ मिलकर लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जो अल्पसंख्यकों और मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हैं. साथ ही संविधान में निहित मूल्यों और सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं.

हिमंत के अलावा दूसरों पर भी आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि हाल के वर्षों में उच्च पदों पर बैठे कई जन प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए बयान चिंता का विषय हैं. इसमें हिमंत सरमा का कथित मुस्लिम विरोधी बयान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विधानसभा में मुल्ला वाली टिप्पणी शामिल है. याचिका में महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के बयान का भी जिक्र है जिसमें उन्होंने मुसलमानों को पाकिस्तानी दलाल कहा था और NSA अजीत डोभाल के बयान का भी जिसमें उन्होंने युवाओं से इतिहास का बदला लेने का आग्रह किया था.

शूटिंग वीडियो विवाद क्या था?

हाल ही में असम बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया गया था. पॉइंट ब्लैंक शॉट कैप्शन वाले इस वीडियो में सरमा को एयर राइफल से फायरिंग करते हुए दिखाया गया था. इस वीडियो में AI-जनरेटेड सीन शामिल थे जिसमें कथित मुसलमानों को गोली मारते हुए दिखाया गया था. वीडियो में विदेशी मुक्त असम और कोई दया नहीं जैसे संदेश भी दिखाए गए थे. इस वीडियो को मुसलमानों के खिलाफ नफरत भड़काने वाला बताया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट पर नजरें

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ऐसे बयान न केवल देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देते हैं, बल्कि देश की संवैधानिक व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करते हैं. अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं कि वह इस मामले पर क्या रुख अपनाता है. पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के अलावा, याचिकाकर्ताओं में प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा, जॉन दयाल और अन्य शामिल हैं. याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है.

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