लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधन विधेयक के गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया. उन्होंने इसके लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि स्वार्थ की वजह से बिल पारित नहीं होने दिया गया.
पीएम मोदी ने कहा कि देश की नारी शक्ति सब देख रही है और बिल गिरने से उन्हें दुख हुआ. करीब 30 मिनट के संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि उनका आत्मबल अजेय है और सरकार ने हार नहीं मानी है.
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति की उड़ान को रोका गया और उनके सपनों को कुचल दिया गया. सरकार ने पूरी कोशिश की, लेकिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो सका.
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि वे हर रुकावट को दूर करेंगे. उन्होंने कहा कि संख्या बल की कमी का मतलब हार नहीं है और आगे भी मौके मिलेंगे.
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह जरूरी फैसलों को टालती रही है और सुधारों का विरोध करती है. उन्होंने जनधन, आधार, डिजिटल पेमेंट्स, जीएसटी, तीन तलाक कानून, आर्टिकल 370, यूनिफॉर्म सिविल कोड, वन नेशन वन इलेक्शन जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस हर रिफॉर्म में बाधा डालती है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची शुद्धिकरण, सीएए और नक्सलवाद के खिलाफ प्रयासों का भी विरोध करती रही है. परिसीमन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को भी उन्होंने खारिज किया और कहा कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ेंगी.
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि परिवारवादी दल महिलाओं के सशक्तिकरण से डरते हैं. उन्होंने कहा कि पंचायतों में महिलाएं अपनी क्षमता साबित कर चुकी हैं और अब संसद व विधानसभाओं में आगे बढ़ना चाहती हैं.
उन्होंने नारी शक्ति वंदन संशोधन को महिलाओं के सशक्तिकरण का महायज्ञ बताया और कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि उसने इस प्रयास को रोक दिया. उन्होंने कहा कि यह नारी शक्ति और संविधान दोनों के साथ अन्याय है.
अंत में पीएम मोदी ने कहा कि नारी अपना अपमान नहीं भूलती और विपक्ष के इस रवैये को महिलाएं याद रखेंगी. उन्होंने कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी पर स्वार्थी राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि इसका नुकसान देश की महिलाओं को हुआ है.