धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे के बाद बड़ा दावा, बोले- Gen Z के दम पर बनेगा ‘विश्व गुरु’ भारत

इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार सार्वजनिक मंच से अपने फैसले की वजह साझा की। उन्होंने विरोधियों को संदेश दिया। यहां जानिए उन्होंने क्या कहा।

Date Updated Last Updated : 09 August 2026, 10:38 AM IST
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Courtesy: X (@iamdmkrishna)

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से त्यागपत्र देने के दो सप्ताह बाद वरिष्ठ भाजपा नेता और संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। संबलपुर स्थित गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक विवाद के दौरान देश की नई पीढ़ी यानी Gen Z को गुमराह करने की कोशिशें की गई थीं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बीच 25 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद यह पहला मौका था जब प्रधान ने किसी सार्वजनिक मंच से अपने फैसले की वजह साझा की। उन्होंने विरोधियों को संदेश देते हुए कहा कि एक किसान का बेटा होने के नाते वे जनसेवा के मार्ग से कभी पीछे नहीं हटने वाले। 

पद से बड़ा युवाओं का भविष्य और राष्ट्र निर्माण

विश्वविद्यालय के सभागार में अपनी बात रखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी हमारे अपने बच्चों की तरह है। भारत में हर साल लगभग दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं और पिछले एक दशक में 20 करोड़ से अधिक युवा इस राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़े हैं। 

इन सभी युवाओं की अपनी विशिष्ट आकांक्षाएं हैं और यही पीढ़ी भारत को 'विश्व गुरु' बनाने का सपना साकार करेगी। उन्होंने कहा कि उनके लिए मंत्री पद कभी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का जरिया नहीं रहा। 

आरोपों पर खुलकर रखी अपनी बात
 

संबोधन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों का भी कड़ा जवाब दिया। पटनायक द्वारा उन्हें राज्य के लिए 'शर्मिंदगी' और 'बुरा व्यक्ति' कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने सीधे जनता से संवाद किया। प्रधान ने पूछा कि क्या उनके राजनीतिक जीवन के किसी भी कदम से ओडिशा की जनता का सिर नीचा हुआ है? उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि भले ही वे राज्य के लिए कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल न कर पाए हों, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे ओडिशा की साख पर आंच आए। 

राजनीतिक मर्यादा का उदाहरण

कार्यक्रम के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब देखने को मिला जब मंच पर बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा में उप-नेता प्रसन्ना आचार्य भी उपस्थित थे। विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए प्रधान ने बताया कि विश्वविद्यालय आने से पूर्व उन्होंने स्वयं प्रसन्ना बाबू से सलाह ली थी। जब बीजेडी नेता ने उन्हें पूर्ण सम्मान और सुरक्षा का भरोसा दिया, तभी उन्होंने कार्यक्रम में शिरकत की। प्रधान ने कहा कि भगवान जगन्नाथ और मां समलेश्वरी के आशीर्वाद से ही उन्हें 12 वर्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में देश सेवा का अवसर मिला था। उन्होंने विरोधियों को संदेश देते हुए कहा कि एक किसान का बेटा होने के नाते वे जनसेवा के मार्ग से कभी पीछे नहीं हटने वाले। पटनायक द्वारा उन्हें राज्य के लिए 'शर्मिंदगी' और 'बुरा व्यक्ति' कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने सीधे जनता से संवाद किया।

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