कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह विधेयक विधानसभा में रखा गया. विपक्षी दलों के विधायकों ने विधेयक पेश किए जाने का जोरदार विरोध किया. उन्होंने मांग की कि विधेयक लाने से पहले सभी पक्षों के साथ व्यापक चर्चा की जानी चाहिए थी.
विधेयक में असम के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखकर यह विधेयक तैयार किया गया है. सरमा ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति या धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं देगा. लोगों के मन में जो आशंका है कि पूजा-पाठ और रीति-रिवाज भी इसके अंदर आएंगे, वह पूरी तरह गलत है.
सरकार के अनुसार UCC विधेयक के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
राज्य में बहुविवाह प्रथा को पूरी तरह खत्म करना
विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र लागू करना
सभी शादियों और तलाक को अनिवार्य रूप से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करना
बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर अधिकार दिलाना
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए सख्त नियम और अनिवार्य पंजीकरण
विपक्षी दलों ने विधेयक का पुरजोर विरोध किया है. कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकंदर ने कहा कि असम में UCC लागू करने से कोई फायदा नहीं होगा. विपक्ष का आरोप है कि सरकार महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए यह विधेयक लाई है. बीजेपी का कहना है कि मुख्यमंत्री सरमा ने जनता से जो वादा किया था, उसे पूरा कर रहे हैं. पार्टी ने विपक्ष पर माहौल खराब करने का आरोप लगाया है.
असम सरकार का दावा है कि यह विधेयक राज्य की विशेष जनसांख्यिकीय स्थिति को ध्यान में रखकर बनाया गया है. UCC को लेकर देशभर में चर्चा जारी है. असम में इस विधेयक के पास होने के बाद यह कानून बन सकता है, जिसका राज्य की सामाजिक व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा.