नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरू मध्य में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करने का हवाला देते हुए ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं.
ईरान के समुद्री और सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान के उन समुद्री बुनियादी ढांचों और सैन्य सुविधाओं को ध्वस्त करना था, जिनका उपयोग वह वाणिज्यिक जहाजों को डराने या रोकने के लिए करता था. शुरुआती रिपोर्टों से पता चला है कि अमेरिकी हमलों में ईरानी सेना के जहाजी घाट, मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और नजदीकी सैन्य संपत्तियों को सटीक रूप से निशाना बनाया गया है. नागरिक बंदरगाहों और तेल-ऊर्जा से जुड़े संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर को इस कार्रवाई से दूर रखा गया.
जहाजों पर हमले के बाद भड़की सैन्य कार्रवाई
यह अमेरिकी सैन्य कार्रवाई मंगलवार को ओरमुज़ जलडमरू मध्य से गुजर रहे तीन मालवाहक जहाजों पर हुए हमलों के बाद की गई है, जिसका सीधा आरोप वाशिंगटन ने तेहरान पर लगाया था. अमेरिका की इस कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए लगातार दूसरे दिन कुवैत और बहरीन को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य बेस मौजूद हैं। इस ताजा सैन्य आदान-प्रदान ने क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और शांति बहाली के वैश्विक प्रयासों को बड़ा झटका दिया है.
राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन विमान से संवाददाताओं से बात करते हुए ईरान को बेहद सख्त शब्दों में चेतावनी दी. ट्रंप ने कहा, हमने उन्हें बहुत करारा जवाब दिया है. मैं कहूंगा कि हमारा अनुपात 20 और 1 का रहा है. अब से वे जब भी हम पर हमला करेंगे, हम उसका 20 गुना ज्यादा पलटवार करेंगे. जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका पूरी तरह से सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ रहा है, तो उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो हम इसे बहुत जल्द जीत लेंगे. उन्होंने दावा किया कि सैन्य मोर्चे पर ईरान के पास अब बहुत कम ताकत बची है और वह समझौते के लिए बेताब है.
ईरान का पलटवार
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है. ईरान के संसदीय अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए वाशिंगटन को घेरा. उन्होंने लिखा, अमेरिका अभी तक यह नहीं सीख पाया है कि अब दुनिया में दादागिरी करने और अपने वादे तोड़ने की उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.