ईरान पर अमेरिका का सबसे बड़ा एक्शन! होर्मुज में हमले के बाद मिसाइलों से जवाब, शांति वार्ता पर मंडराया संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन व्यापारी जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया.

Date Updated Last Updated : 08 July 2026, 08:21 AM IST
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Courtesy: Gemini

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर "शक्तिशाली हवाई हमले" किए. इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच जारी शांति वार्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. माना जा रहा है कि हालात नहीं सुधरे तो संघर्ष फिर से तेज हो सकता है.

होर्मुज में जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका की कार्रवाई

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद यह सैन्य कार्रवाई की गई. अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में नागरिक जहाजों पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता.

अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी केंद्र, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल लॉन्च साइट और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया. इसके अलावा कुछ बंदरगाह सुविधाओं पर भी हमले किए गए.

CENTCOM ने क्या कहा?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान को उसके कदमों की "भारी कीमत" चुकाने के लिए मजबूर करना है. CENTCOM के मुताबिक, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला किया, जो युद्धविराम की भावना के खिलाफ है.

ईरान में कई जगह धमाकों की खबर

ईरानी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी ईरान के सीरिक, क़ेश्म और बंदर अब्बास के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं. स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि सीरिक बंदरगाह के व्यावसायिक और मछली पकड़ने वाले घाट भी हमलों की चपेट में आए.

अमेरिका ने ईरानी तेल लाइसेंस भी किया रद्द

जहाजों पर हमले के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देने वाला विशेष लाइसेंस भी रद्द कर दिया. यह लाइसेंस अंतरिम समझौते के तहत अगस्त तक लागू रहने वाला था. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान की कार्रवाई के बाद यह फैसला जरूरी हो गया.

क्या शांति समझौते पर पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए सैन्य टकराव से दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता को बड़ा झटका लग सकता है. यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बना रहा तो वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है. आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी.

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