महाराष्ट्र चुनाव में हुई गड़बड़ी...', राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि महज पांच महीनों में राज्य की मतदाता सूची में 39 लाख नए नाम जोड़े गए, जो हिमाचल प्रदेश की कुल मतदाता संख्या से अधिक है.

Date Updated Last Updated : 07 February 2025, 03:51 PM IST
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RahulGandhi: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि महज पांच महीनों में राज्य की मतदाता सूची में 39 लाख नए नाम जोड़े गए, जो हिमाचल प्रदेश की कुल मतदाता संख्या से अधिक है.

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि 2019 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव तक पांच सालों में 32 लाख मतदाता जोड़े गए. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सिर्फ 5 महीनों में 39 लाख नए मतदाता आ गए. ये मतदाता कौन हैं? महाराष्ट्र में अचानक इतनी बड़ी संख्या में मतदाता कैसे जुड़ गए?

चुनाव में गड़बड़ी का आरोप

कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का दावा किया है. राहुल गांधी ने कहा कि हमने मतदाता सूची और वोटिंग पैटर्न की विस्तृत जांच की है. हमारी टीमों ने कई गड़बड़ियां पकड़ी हैं. हमने पहले भी चुनाव आयोग को इन विसंगतियों के बारे में बताया था और अब हम लोकसभा व विधानसभा चुनावों की मतदाता सूची मांग रहे हैं.

देवेंद्र फडणवीस का पलटवार

भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने सभी सवालों के जवाब दे दिए हैं. राहुल गांधी झूठ के सहारे अपनी हार को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. 8 फरवरी को दिल्ली चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस पूरी तरह खत्म हो जाएगी और राहुल गांधी अभी से उस दिन के लिए नया नैरेटिव गढ़ने का अभ्यास कर रहे हैं. अगर वे आत्ममंथन नहीं करेंगे और झूठी बातें दोहराते रहेंगे, तो उनकी पार्टी का पुनरुद्धार संभव नहीं है.

एनडीए की ऐतिहासिक जीत

महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) के गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया. कुल 288 सीटों में से 235 पर जीत दर्ज कर विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन को मात्र 49 सीटों पर सीमित कर दिया. यह जीत उस लोकसभा चुनाव के कुछ महीनों बाद आई, जिसमें विपक्ष ने भाजपा गठबंधन को कड़ी टक्कर दी थी.

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