नई दिल्ली: कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में मंगलवार 19 मई को एक मस्जिद पर दो नाबालिग युवकों ने गोलीबारी कर दी. इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई. हमलावरों ने घटना के बाद खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. पुलिस इस मामले को हेट क्राइम मानकर जांच कर रही है.
दोनों हमलावरों ने सैन डिएगो के 'इस्लामिक सेंटर' मस्जिद को निशाना बनाया. उन्होंने मस्जिद के बाहर और आसपास ताबड़तोड़ गोलियां चलाई. मस्जिद का सुरक्षाकर्मी समेत तीन लोग इस गोलीबारी में मारे गए. हमलावर मस्जिद से भागने के बाद रास्ते में एक व्यक्ति पर भी गोली चला गए. इसके बाद दोनों ने पास ही खड़ी अपनी कार में बैठकर खुद को गोली मार ली.
पुलिस के मुताबिक, सूचना मिलते ही अधिकारी मात्र चार मिनट में मौके पर पहुंच गए, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था. पुलिस चीफ स्कॉट वाह्ल ने बताया कि हमलावरों ने किसी पुलिसकर्मी से गोलीबारी नहीं की. यह पूरी तरह से आत्मघाती हमला था.
हमलावरों की उम्र 17 और 19 साल बताई गई है. दोनों ने अपने घरों से हथियार चुराकर यह हमला किया. पुलिस का कहना है कि यह कोई सोची-समझी योजना के तहत किया गया हमला था. दोनों युवक मस्जिद से थोड़ी दूरी पर कार में मृत पाए गए.
जांच में पता चला है कि 17 साल के हमलावर की मां ने हमले से महज दो घंटे पहले पुलिस को फोन किया था. उन्होंने बताया कि उनका बेटा सुसाइडल है और घर से हथियार लेकर भाग गया है. इसके बाद पुलिस ने उसके स्कूल में सुरक्षा बढ़ा दी, लेकिन तब तक दोनों हमलावर मस्जिद की ओर निकल चुके थे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को बेहद भयानक बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें शुरुआती जानकारी मिली है और पूरा मामला गंभीरता से लिया जा रहा है. कैलिफोर्निया के गवर्नर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रार्थना करने वाले किसी भी जगह पर अपनी जान का डर महसूस नहीं करना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि कैलिफोर्निया में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है और राज्य सरकार सैन डिएगो के मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी है.