ट्रंप टैरिफ को लगा बड़ा झटका! भारतीय निर्यातकों की सरकार से ये मांग 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 25 प्रतिशत आयात शुल्क ने भारतीय निर्यातकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. खाद्य, समुद्री, कपड़ा, और अन्य क्षेत्रों के निर्यातकों ने इस शुल्क के प्रभाव को कम करने के लिए भारत सरकार से वित्तीय सहायता और किफायती ऋण की मांग की है.

Date Updated Last Updated : 03 August 2025, 05:41 PM IST
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Trump tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 25 प्रतिशत आयात शुल्क ने भारतीय निर्यातकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. खाद्य, समुद्री, कपड़ा, और अन्य क्षेत्रों के निर्यातकों ने इस शुल्क के प्रभाव को कम करने के लिए भारत सरकार से वित्तीय सहायता और किफायती ऋण की मांग की है.

मुंबई में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई बैठक में निर्यातकों ने अपनी चिंताओं को सामने रखा और कई अहम सुझाव दिए.

निर्यातकों की मांग

निर्यातकों ने बताया कि अमेरिकी बाजार में बढ़ते शुल्क के कारण उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं को लागू करने की मांग की, ताकि निर्यात क्षेत्र को मजबूती मिले.

इसके अलावा सस्ती ब्याज दरों पर ऋण और राजकोषीय प्रोत्साहन की मांग भी जोर-शोर से उठी. एक उद्योग अधिकारी ने बताया कि निर्यातकों ने अपने सुझाव लिखित रूप में सरकार को भेजने का फैसला किया है, जैसा कि मंत्री पीयूष गोयल ने सुझाया.

भारत में ब्याज दरें

निर्यातकों ने बताया कि भारत में ब्याज दरें 8 से 12 प्रतिशत या उससे भी अधिक हैं, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी ज्यादा हैं. उदाहरण के लिए, चीन में केंद्रीय बैंक की दर 3.1%, मलेशिया में 3%, थाईलैंड में 2%, और वियतनाम में 4.5% है.

इन कम ब्याज दरों के कारण अन्य देशों के निर्यातक लागत में कमी लाकर बाजार में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. भारतीय निर्यातकों का कहना है कि सरकार को सस्ते ऋण उपलब्ध कराने के लिए नीतिगत बदलाव करने चाहिए.

कपड़ा, आभूषण, और झींगा निर्यात पर संकट

25 प्रतिशत ट्रंप टैरिफ का असर कई प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका है. कपड़ा और वस्त्र (10.3 अरब डॉलर), रत्न और आभूषण (12 अरब डॉलर), झींगा (2.24 अरब डॉलर), चमड़ा और जूते-चप्पल (1.18 अरब डॉलर), रसायन (2.34 अरब डॉलर), और विद्युत व यांत्रिक मशीनरी (9 अरब डॉलर) जैसे क्षेत्रों को भारी नुकसान हो सकता है.

विशेष रूप से अमेरिका में भारत के चमड़ा और परिधान निर्यात की हिस्सेदारी 30% से अधिक है. निर्यातकों का कहना है कि अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर रद्द करना या रोकना शुरू कर दिया है, जिससे आने वाले महीनों में निर्यात में भारी गिरावट और नौकरियों पर संकट का खतरा है.

सरकार के सामने चुनौतियां

निर्यातकों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप टैरिफ, जो 7 अगस्त 2025 से लागू होगा, मौजूदा आयात शुल्क के अतिरिक्त होगा. इससे भारत के निर्यात क्षेत्र पर दबाव और बढ़ेगा.

हालांकि, सरकार के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन देना आसान नहीं होगा. फिर भी, निर्यातकों ने सरकार से त्वरित कदम उठाने की अपील की है ताकि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत रहे.

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