ताइवान ने भारत के स्वदेशी डी4 एंटी-ड्रोन सिस्टम की खरीद के लिए किया अनुरोध, जानिए  वजह 

भारत की रक्षा तकनीक ने वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है क्योंकि ताइवान ने भारत से स्वदेशी डी4 एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदने में आधिकारिक तौर पर रुचि व्यक्त की है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस अत्याधुनिक प्रणाली ने हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अपनी प्रभावशीलता साबित की है.

Date Updated Last Updated : 06 June 2025, 06:24 PM IST
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D4 Anti-Drone System: भारत की रक्षा तकनीक ने वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है क्योंकि ताइवान ने भारत से स्वदेशी डी4 एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदने में आधिकारिक तौर पर रुचि व्यक्त की है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस अत्याधुनिक प्रणाली ने हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अपनी प्रभावशीलता साबित की है. 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत निर्मित यह प्रणाली अब वैश्विक मांग बन गई है, जो रक्षा नवाचार में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाती है.

पाकिस्तान के ड्रोन्स का काल

डीआरडीओ द्वारा विकसित डी4 (ड्रोन डिटेक्ट, डिटर, एंड डिस्ट्रॉय) सिस्टम ने पाकिस्तान द्वारा भेजे गए तुर्की मूल के ड्रोन झुंडों को नष्ट करके अपनी क्षमता का लोहा मनवाया.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम ने प्रभावी ढंग से पाकिस्तानी ड्रोन्स को नाकाम किया, जिसमें तुर्की निर्मित बायरक्तर टीबी2 ड्रोन्स भी शामिल थे. यह सिस्टम रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तकनीकों का संयोजन करता है, जो इसे हवा में खतरों को पहचानने और नष्ट करने में सक्षम बनाता है.

ताइवान की रुचि

ताइवान ने चीन से बढ़ते ड्रोन खतरों के बीच भारत के डी4 सिस्टम को अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति माना है. ताइवान के इस अनुरोध से भारत और ताइवान के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.

डी4 सिस्टम की सफलता ने न केवल भारत की सीमाओं को सुरक्षित किया, बल्कि इसे वैश्विक रक्षा बाजार में एक आकर्षक विकल्प भी बना दिया. भारत की यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की सफलता का प्रतीक है.

मेक इन इंडिया

डीआरडीओ और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा निर्मित डी4 सिस्टम 'मेक इन इंडिया' की भावना को दर्शाता है. इसकी 360-डिग्री निगरानी और दोहरे हमले (सॉफ्ट किल और हार्ड किल) की क्षमता ने इसे आधुनिक युद्ध में गेम-चेंजर बना दिया. ताइवान सहित कई देश अब इस तकनीक में रुचि दिखा रहे हैं, जो भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को उजागर करता है.

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